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संदेह के घेरे में रहे ये 7 एनकाउंटर, पुलिस पर उठे सवाल

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बीते हफ्ते आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में हुए एनकाउंटर सवालों के घेरे में हैं। जिन हत्याओं को पुलिस मुठभेड़ का नाम देने पर तुली है, वह पूरी तरह से सोची समझी रणनीति के तहत निर्दोषों की हत्या थी, ऐसा सामने आ रहा है।
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आंध्रप्रदेश के चित्तूर के जंगल में हुई मुठभेड़ में जो 20 कथित चंदन तस्कर मारे गए थे, वे तमिलनाडु के थे। इनमें से कुछ के शवों पर जले के निशान थे तो कुछ के सीने और सिर में गोली मारी गई थी। वहीं, तेलंगाना में जिन लोगों को आतंकी बताकर एनकाउंटर का दावा किया गया है वे भी पुलिस की साजिश का शिकार हुए हैं।

हैरानी की बात ये है कि पुलिस की ओर से जितने भी एनकाउंटर किए गए उनमें से ज्यादातर सवालों के घेरे में आते रहे लेकिन पुलिस की बर्बरता थमी नहीं। पढ़िए, उन चुनिंदा एनकाउंटर्स के बारे में जिनके चलते हुई पुलिस की किरकिरी।
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1- मीना खलखो हत्याकांड: पुलिस की खौफनाक साजिश

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में कथित तौर पर हुई मुठभेड़ में मारी गई आदिवासी युवती मीना खलखो की हत्या की पुष्टि हो गई। न्यायिक जांच की रिपोर्ट ने चार साल बाद इसकी पुष्टि की है। न्यायिक जांच रिपोर्ट आने के बाद राज्य सरकार ने प्रतिपरीक्षण रिपोर्ट पेश करने का जिम्मा सीआईडी को सौंपा।

सरगुजा जिले के चांदो थाना क्षेत्र में आदिवासी लड़की मीना खलखो की मौत जुलाई 2011 में हुई थी। इस घटना को लेकर काफी बवाल हुआ। पुलिस ने मीना खलखो पर नक्सली होने का आरोप लगाया था। वहीं, विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने इसे फर्जी मुठभेड़ करार दिया था।

यह मामला विधानसभा में भी काफी जोरशोर से उठा जिसके बाद राज्य सरकार ने इसके लिए जस्टिस अनिता झा की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित किया। आयोग ने चार साल बाद अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी है।

15 वर्षीय मीना खलखो को चांदो पुलिस ने 5-6 जुलाई 2011 की रात एनकाउंटर में मारने का दावा किया था, लेकिन जांच में यह गलत साबित हुआ। उस रात कोई एनकाउंटर हुआ ही नहीं।

दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने मीना को बंधक बनाकर उसके साथ बलात्कार किया और फिर गोली मारकर उसकी हत्या कर दी।

2- इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ कांड

मुंबई की रहने वाली 19 वर्षीय इशरत जहां को 3 अन्य लोगों के साथ गुजरात पुलिस मे एक मुठभेड़ में मार गिराया गया। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इशरत जहां के साथ उसके साथी जीशान जोहार, अमजद अली राणा और प्रनेश पिल्लई भी 15 जून 2004 को मुठभेड़ में मारे गए।

पुलिस ने दावा किया था कि ये चारों आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश में जुटे थे।

इस मामले ने तूल पकड़ा तो जांच सीबीआई को सौंपी गई जिसमें खुलासा हुआ कि इशरत जहां और उसके चारों साथियों की साजिशन हत्या की गई थी। तत्कालीन गुजरात सरकार ने इस जांच रिपोर्ट को हाईकोर्ट में चुनौती दी। 2013 में इशरत जहां एनकाउंटर को साजिश करार देते हुए सीबीआई ने 3 जून 2013 को अहमदाबाद कोर्ट में पहली चार्जशीट पेश की।

सीबीआई ने गुजरात के एडीजीपी पीपी पांडे, पूर्व डीआइजी डीजी वंजारा, आइपीएस जीएल सिंघल समेत तरुण बारोट, एनके अमीन, जेजी परमार और अनाजू चौधरी को आरोपी बनाया था।

3- सोहराबुद्दीन शेख हत्याकांड

अंडरवर्ल्ड से जुड़े अपराधी सोहराबुद्दीन शेख की 26 नवंबर 2005 को पुलिस कस्टडी में मौत हुई थी। घटना वाले दिन सोहराब अपनी पत्नी के साथ हैदराबाद से महाराष्ट्र जा रहा था, लेकिन गुजरात पुलिस की एटीएस शाखा ने बस रुकवाई और सोहराब को उसकी बीवी के साथ उतार लिया।

तीन दिन तक पुलिस ने उसे कस्टडी में रखा और फिर उसे अहमदाबाद के बाहर एक कथित एनकाउंटर में मार डाला। सोहराब की हत्या की वजह से देश भर में हदचल हुई और आखिरकार इस मामले की जांच भी सीबीआई को सौंप दी गई।

सीबीआई जांच में पुलिस की थ्योरी गलत साबित हुई और यह एनकाउंटर भी फर्जी घोषित कर दिया गया। जांच के बाद एनकाउंटर में शामिल रहे गुजरात के कई पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तार कर लिया गया और उनमें से कइयों को जेल की सजा हुई। इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को भी आरोपी बनाया गया था, हालांकि बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई।

4- तुलसीराम प्रजापति फर्जी एनकाउंटर

सोहराबुद्दीन शेख के एनकाउंटर मामले के एक मात्र गवाह तुलसीराम प्रजापति भी पुलिस कस्टडी में मारा गया। कहा जाता है कि तुलसीराम, सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर का चश्मदीद था। पुलिस ने उसे सोहराब की हत्या के ठीक एक साल बाद मार डाला था।

दोनों मामलों के लिंक को देखते हुए 2011 में इसकी जांच भी सीबीआई को सौंप दी गई। जिसके बाद पुलिस एक बार फिर बेनकाब हो गई।

सीबीआई के मुताबिक, सोहराबुद्दीन पर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तोएबा से संबंध होने का आरोप था। सीबीआई ने वर्तमान भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पर हत्या की साजिश रचने और सबूत मिटाने का मामला दर्ज किया था। इसमें अमित शाह के साथ राजस्थान के मंत्री गुलाबचंद कटारिया और गुजरात पुलिस के कई बड़े अफसरों समेत 38 लोग आरोपी बनाए गए थे।

हालांकि बाद में अमित शाह को आरोप मुक्त कर दिया गया। इस मामले में शाह ने कुद ही याचिका दायर कर आरोप मुक्त करने की अपील की थी। उनका कहना था कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया जा रहा है।

5- बटला हाउस एनकाउंटर केस

19 सितंबर 2008 को दिल्ली के जामियानगर में बटला हाउस एनकाउंटर हुआ। इस एनकाउंटर के दौरान दो संदिग्ध मारे गए, जबकि दो को गिरफ्तार किया गया। यह एनकाउंटर भी खूब चर्चा में रहा और पुलिस का कारनामा सवालों के घेरे में आ गया। इसके खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन हुए और बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए।

पुलिस ने दावा किया था कि 13 सितंबर 2008 को दिल्ली के करोल बाग, कनाट प्लेस, इंडिया गेट व ग्रेटर कैलाश में सीरियल बम धमाके हुए थे, जिनमें 26 लोग मारे गए थे और 133 घायल हुए।

इसके छह दिन बाद 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिदीन के पांच आतंकी बटला हाउस स्थित एक मकान में मौजूद हैं। सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा के नेतृत्व में सात सदस्यीय टीम जब छापा मारने पहुंची तो आतंकियों ने पुलिसकर्मियों पर गोली चलानी शुरू कर दी।

एनकाउंटर में इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा सहित दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जवाबी फायरिंग में पुलिस ने दो आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद को मार गिराया था। जबकि दो आतंकी मोहम्मद सैफ और जीशान को गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन एक आतंकी भागने में सफल रहा था।

इस एनकाउंटर को लेकर सबसे ज्यादा गुस्सा जामिया के छात्रों और शिक्षकों में देखने को मिला। मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ा और घटना की सीबीआई जांच की मांग की जाने लगी, हालांकि 2009 में मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दे दी गई।

6- दिल्ली: अंसल प्लाजा एनकाउंटर

दिल्ली पुलिस की ओर से 2002 में किया गया ये एनकाउंटर काफी समय तक विवादों में रहा। पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने अंसल प्लाजा के बेसमेंट में दो आतंकियों को मार गिराया है।

हालांकि इस मामले में सामने आए एक डॉक्टर ने खुद को घटना का चश्मदीद बताते हुए एनकाउंटर को फर्जी करार दिया। उन्होंने कुछ नामों की लिस्ट भी जारी की और दावा किया कि ये लोग उस फर्जीवाड़े के पीछे हैं।

हालांकि यह बात हैरान करने वाली रही कि घटना से जुड़े दूसरे गवाहों के बयान डॉक्टर से अलग थे। बाद में डॉक्टर हरिकृष्ण खुद ही काफी समय के लिए गायब रहे और बाद में जब सामने आए तो वे अपने दावे को साबित नहीं कर सके। इस एनकाउंटर में मानवाधिकार आयोग ने दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दी थी।
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7- रामनारायन गुप्ता उर्फ लखन भैया

अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन का गुर्गा कहे जाने वाले रामनारायन गुप्ता उर्फ लखन भैया को मुंबई के वर्सोवा के पास एनकाउंटर में मार डाला गया था। लखन भैया पर आपराधिक गतिविधियों का शक होने पर पुलिस ने नवी मुंबई से 11 नवंबर 2006 उठाया।

पुलिस ने उसी दिन लाखन को मार दिया और उसकी हत्या को मुठभेड़ की शक्ल देने की कोशिश की। लाखन के भाई और मां ने इस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की। बाद में यह एनकाउंटर वाकई फर्जी साबित हुऐ और इसमें 22 पुलिस वालों की गिरफ्तारी हुई।

इस मामले में अदालत में 21 लोगों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई। दोषियों में 13 पुलिसवाले भी शामिल हैं। सरकारी पक्ष ने 15 लोगों को मौत की सजा देने की मांग की थी।

11 नवंबर 2006 की शाम को दोषी पुलिसवालों ने दावा किया था कि उन्होंने ने अंधेरी के नाना नानी पार्क के पास छोटा राजन के गुंडे लखन भैया को मुठभेड़ में मार गिराया है।
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