पुलिस की लापरवाही के चलते एक खूंखार कातिल करीब दो दशक तक खुलेआम घूमता रहा और इस दौरान उसने लगभग 200 महिलाओं को अपना शिकार बनाया। उसने महिलाओं की हत्या की और फिर उनकी लाश को भी ठिकाने लगा दिया।
इस सीरियल किलर की करतूत को पुलिस इसलिए नजरअंदाज करती रही, क्योंकि मरने वाली महिलाएं या तो ड्रग्स की लती थीं या फिर वेश्या। पुलिस की इस नाकामी का खुलासा एक डॉक्युमेंट्री फिल्म में हुआ है।
आरोपी कातिल लॉनी फ्रैंकलिन को इन हत्याओं के आरोप में अब कोर्ट में पेश किए जाने की तैयारी है। उस पर 20 साल तक महिलाओं के यौन उत्पीड़न, हत्या और लाशें छुपाने के आरोप लगे हैं।
डॉक्युमेंट्री में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी आगे भी हत्याओं को अंजाम देने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि उसे ऐसा करने की आजादी मिल चुकी थी। पुलिस ने लगातार हो रही वारदातों को इस कदर नजरअंदाज किया कि उसका हौसला बढ़ता गया।
ऐसे ठिकाने लगाता था लाशें
डेली मेल के अनुसार, आरोपी फ्रैंकलिन ने इन वारदातों को लॉस एंजेलेस में अंजाम दिया। डॉक्युमेंट्री बनाने वाले निक ब्रूमफील्ड ने कहा कि अगर पुलिस सही तरीके से हत्याओं की छानबीन करती तो कई महिलाओं, वेश्याओं और ड्रग एडिक्ट महिलाओं की जान बचाई जा सकती थी। शहर के लोगों के यह पता नहीं था कि कोई ऐसा है जो उन्हें शिकार बना रहा है।
पेशे से डिब्बे बेचने वाला फ्रैंकलिन महिलाओं की हत्या करके उनकी लाशों को कारपेट में लपेटकर खराब डिब्बों में भरकर फेंक देता था। उस पर 1985 में 10 महिलाओं की हत्या के आरोप में अब जून महीने में केस चलेगा।
अपराधों की छानबीन के दौरान जब पुलिस ने उसके घर की तलाशी ली तो वहां से 180 महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले। इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि उसने कुछ महिलाओं को गड्ढे में दफना दिया हो क्योंकि जिन डिब्बों में वह लाशें रखकर फेंकता था, वह कहीं और डंप किया जाता था।
ब्रूमफील्ड ने कहा कि जिस वक्त ये अपराध हो रहे थे तब पुलिस और मीडिया में इस बात की चर्चा हुई थी कि करीब 200 महिलाओं लापता हुई हैं, लेकिन उस समय इस पर कार्रवाई नहीं हुई।
तो ये है इस नरसंहार की बड़ी वजह
ब्रूमफील्ड ने आगे कहा, ''यह कितना आश्चर्यजनक है कि दुनिया के सबसे धनी शहरों में से एक लॉज एंजेलेस के बीच से 200 महिलाएं गायब हो जाती हैं और कोई इसकी फिक्र नहीं करता। यह ठीक उसी तरह है कि कहीं नरसंहार हो रहा है और लोग उसे नजरअंदाज कर रहे हैं।''
ये घटनाएं हॉलीवुड के आसपास हुईं, लेकिन पुलिस ने किसी को भी यह बताने या सावधान करने की कोशिश नहीं की कि उनके आसपास कोई कातिल है। इसके पीछे वजह यह रही क्योंकि शायद पुलिस को उन महिलाओं से नफरत थी। दो बच्चों के पिता फ्रैंकलिन ने उन्हीं महिलाओं को निशाना बनाया जो 1980 के आसपास कोकीन जैसे ड्रग्स की लत से घिर गई थीं।
पुलिस ने उस वक्त अपनी जांच में कहा था कि इन वारदातों में किसी इंसान का हाथ नहीं है। उन्होंने न ही इन हत्याओं को गंभीरता से लिया और न ही गहराई से तहकीकात की। पुलिस ने दावा किया था कि ये हत्याएं वेश्याओं के ही गैंग के लोगों ने की हैं। पुलिस को वेश्याओं से इस कदर नफरत थी कि वे उन्हें कई तरह के नामों से भी पुकारने लगे थे।
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बेवरले जिले में 25 साल तक हत्याओं का ये दौर इसी तरह चलता रहा और आखिरकार यहां पुलिस को पहरा बढ़ाना पड़ा। मीडिया ने भी इसे कवरेज दी। 1988 में ही एक गैंग ने कुछ छात्रों की हत्या कर दी थी, तब इस कदर बवाल भड़का था कि शहर बंद करना पड़ा था, लेकिन इन हत्याओं के मामले में किसी ने कोई कदम नहीं उठाया।
पुलिस ने यदि 1987 में लोगों के सामने जिक्र किया कि सोसायटी में कोई सीरियल किलर है तो शायद ये जानें बच सकती थीं। तब तक आरोपी ने पांच महिलाओं को शिकार बनाया था।
डॉक्युमेंट्री बनाने के सिलसिले में ब्रूमफील्ड में आरोपी के कई रिश्तेदारों और परिजनों से भी बातचीत की थी। उसके बेटे ने कहा कि लगातार हो रही हत्याओं के बावजूद पुलिस उस हत्यारे के प्रति शुक्रगुजार थी, जिनकी नजर में वह सड़कों से गंदगी साफ कर रहा था।
'उसने मुझे निर्वस्त्र होने को मजबूर किया'
एक समय आरोपी फ्रैंकलिन की पड़ोसन रही 'माओ' ने कहा कि शायद वह भी उसका शिकार बनने वाली थी लेकिन किस्मत से बच गई। उसने बताया कि वह आरोपी के साथ 2006 में ड्राइव पर निकली थी, जब उसने उससे न्यूड होकर तस्वीर खिंचवाने पर जोर दिया था और उसकी वह तस्वीर बाद में पुलिस ने आरोपी के घर से बरामद भी की थी।
माओ ने बताया कि उसने दूसरी महिलाओं की तस्वीरें भी दिखाईं, जिन्होंने बेदह अजीबोगरीब पोज दिए थे। शायद उनमें से कई मर चुकी थीं। वह न्यूड तस्वीर खिंचवाने को इसलिए राजी हुई क्योंकि आरोपी ने अपनी वैन में पिस्तौल रखी थी, जिससे वह डर गई।
आरोपी ने 1985 से 1988 के बीच कई हत्याएं कीं, जिसके चलते लोग उस अनजान कातिल को ग्रिम स्लीपर के नाम से पुकारने लगे। इसके बाद उसने 13 साल तक अपराधों से दूरी बनाए रखी और 2002 में एक बार फिर वारदातों को अंजाम देने लगा।
पुलिस ने पिज्जा ब्वॉय बनकर खोली पोल
लगभग एक दर्जन जगहों से डीएनए सैंपल लेने के बाद पुलिस ने आरोपी को जुलाई 2010 में गिरफ्तार किया। पुलिस ने फ्रैंकलिन को पकड़ने के लिए नया तरीका तब आजमाया जब क्राइम लैब ने उसके एक परिजन के डीएनए को घटनास्थल पर मिले डीएनए से मिलता हुआ पाया।
पुलिस ने एक अधिकारी को पिज्जा ब्वॉय बनाकर भेजा ताकि वह किसी तरह फ्रैंकलिन के डीएनए की जांच के लिए कुछ तथ्य हासिल कर सके। खाने से मिले सैंपल से पुलिस ने टेस्ट कराया और आखिरकार वह फंस गया।
आरोपी को हत्या के 10 मामलों और हत्या के प्रयास के एक मामले में जून में कोर्ट में पेश किया जाएगा। आरोपी के अपराधों पर बनी डॉक्युमेंट्री यूके में स्काई अटलांटिक चैनल के जरिए सोमवार को रात 9 बजे दिखाई जाएगी। इसे अमेरिका में भी दिखाने की तैयारी है।