मुजफ्फरनगर में पीनना के जंगल में साढ़े चार माह पूर्व मिली युवक की जली-कटी लाश की शिनाख्त राजस्थान के टोंक जिले के गांव कनवाड़ा निवासी के रूप में हुई है। जमीन खरीदने के बाद रुपये नहीं देने के लिए दोस्त ने ही उसकी हत्या कर लाश को जला दिया था।
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पुलिस ने लाश की जेब में मिली नंबर लिखी पर्ची के सहारे न केवल ब्लाइंड मर्डर का खुलासा किया, बल्कि जयपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार भी कर लिया। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के लिए एक टीम अभी जयपुर में ही डेरा डाले हुए है।
छह जुलाई की सुबह पीनना के जंगल में युवक की अधजली लाश मिली थी। धारदार हथियारों से काटने के बाद लाश को पेट्रोल डालकर जलाया गया था। शिनाख्त नहीं होने पर लाश का लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। शव के पास से एक पर्ची मिली थी, जिस पर मोबाइल नंबर लिखा था।
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पीनना के प्रधान रामधन ने घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसकी जांच शहर कोतवाली के एसएसआई प्रमोद पंवार को सौंपी गई थी। मौके से मिली पर्ची के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए प्रमोद पंवार ने शुक्रवार को घटना का खुलासा कर दिया।
शराब पिलाने के बाद टुकड़ों में काटा डाला
एसएसआई ने बताया कि लाश राजस्थान के टोंक जिले के गांव कनवाड़ा निवासी सत्यनारायण की थी। सत्यनारायण के माता-पिता की मौत हो चुकी थी। उसके नाम छह बीघा जमीन थी, जो उसके गांव के ही दोस्त बहादुर ने छह लाख रुपये में खरीद लिया था।
बैनामा कराने के बाद रुपये नहीं देने के इरादे से बहादुर ने योजना के तहत सत्यनारायण को मसूरी-देहरादून घूमने के लिए राजी कर लिया। चार जुलाई को दोनों दोस्त राजस्थान के देवली निवासी रंजीत की कार से घूमने के लिए निकले।
छह जुलाई की रात कार शहर के बुढ़ाना मोड़ पर पहुंची, तो बहादुर ने शराब पिलाने के बाद धारदार हथियार से काटकर कार में ही सत्यनारायण की हत्या कर दी। इसके बाद लाश को पीनना के जंगल में फेंककर उस पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी और फरार हो गए।
एसएसआई के मुताबिक, बहादुर ने कार चालक रंजीत को भी जुबान बंद रखने के लिए डेढ़ लाख रुपये का लालच दिया था, जिनमें से 50 हजार रुपये उसे दे भी दिए गए थे। पुलिस ने आरोपी कार चालक रंजीत को जयपुर से गिरफ्तार कर लिया, जबकि मुख्य आरोपी बहादुर की तलाश में एक टीम जयपुर में ही डेरा डाले हुए है।
एटा में जीजा-साले की हत्या
अलीगढ़ में गभाना के गांव मढ़की निवासी जयसिंह पाल और चंडौस के गांव बघियान निवासी उनके साले ओमपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। दोनों के शव एटा जिले में मिरहची थानांतर्गत एक नहर में मिले।
दोनों लोग 18 नवंबर को हाल ही में खरीदी अपनी स्कॉर्पियो कार से अलीगढ़ में मकान खरीदने की कहकर निकले थे और तब से लापता थे। उनके साथ तीन लोग और थे, लेकिन उनका भी कोई अता-पता नहीं है।
पुलिस अब उनकी कार और अन्य तीन लोगों का पता लगाने में जुट गई है। ओमपाल ने 28 लाख रुपये की जमीन 15 दिन पहले बेची थी, परिजनों को संदेह है कि संभवत: इसी वजह से उनकी हत्या की गई।
ओमपाल के सीने एवं जयपाल के सिर में गोली लगने के निशान हैं। वहीं धारदार हथियार से मुंह पर चोटों के निशान भी मिले हैं।
ऐसी हालत में मिली लाशें
चंडौस के गांव बघियाना निवासी ओमपाल सिंह (30) पुत्र गजाधर सिंह तीन भाई थे। उसने 12 दिन पहले अपने हिस्से की करीब 8 बीघा जमीन 28 लाख रुपये में बेची थी। 17 नवंबर को वह अपने घर से मढ़की निवासी बहनोई जयसिंह पाल (40) के साथ निकला तब से वापस नहीं आया।
उसकी छोटी बहन मंजू निवासी पनिहावर, गभाना ने पुलिस को बताया कि ओमपाल, बहनोई जयसिंह पाल 18 नवंबर को उसके यहां पनिहावर आए थे और उन्होंने नई स्कॉर्पियो गाड़ी खरीदने की बात बताई थी। उनके साथ तीन लोग और थे। ओमपाल ने मंजू से 3 लाख रुपये और लिए।
इसके बाद दोनों लोग वह चंडौस स्थित बैंक से 12 दिन पूर्व बेची गई जमीन के रुपये निकालने की बात कहकर निकल गए। उसने बताया था कि वह इन रुपयों से अलीगढ़ में मकान खरीदने जा रहा है। तब से उनका कोई पता नहीं चला। इधर अन्य परिजनों का भी उनसे संपर्क नहीं हुआ।
शुक्रवार सुबह गभाना पुलिस ने परिजनों को सूचना दी कि एटा जिले के मिरहची थानाक्षेत्र स्थित गांव रफीपुर के निकट हजारा नहर में दोनों के शव मिले हैं। ओमपाल के सीने एवं जयपाल के सिर में गोली लगने के निशान हैं। वहीं धारदार हथियार से मुंह पर चोटों के निशान भी हैं।
पुलिस के अनुसार परिजनों ने उन्हें बताया है कि 18 नवंबर को बुलंदशहर के गांव जहांगीरपुर निवासी दो रिश्तेदार ओमपाल को अलीगढ़ में मकान दिलाने के लिए बैंक से रुपये निकालने के बहाने ले गए थे।
इन रिश्तेदारों ने ही एक दिन पहले उसे स्कॉर्पियो दिलवाई थी। इसके बाद से ओमपाल और जयपाल लापता थे। अभी यह नहीं पता चला कि बैंक से आरोपियों ने रुपये निकाल लिए हैं या नहीं। यह बैंक में जानकारी करने पर पता चलेगा। दोनों के खिलाफ तहरीर दे दी गई है।
वोटर कार्ड से हुई शिनाख्त ओमपाल और जयसिंह पाल के लापता होने के कारण परिजन बहुत परेशान थे। सुबह पुलिस ने उनकी हत्या की खबर दी तो परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस ने बताया कि दोनों की जेब से वोटर आईडी कार्ड मिले जिसके आधार पर शिनाख्त हो सकी।
अब पिता का साया भी नहीं रहा गांव बघियाना निवासी ओमपाल की पत्नी ने एक साल पहले आत्महत्या कर ली थी। मां की मौत के बाद उनका तीन वर्षीय बेटा बजरंगी फूफा जयसिंह पाल के यहां रहता था। ओमपाल की मौत के बाद उसके सिर से पिता का साया भी उठा गया।