मुंबई निवासी भारतीय मूल के एक व्यक्ति को सऊदी अरब में गोलियों से भूनकर मारने के आदेश दिए गए हैं। ये आदेश सऊदी की एक अदालत ने दिए हैं।
इस शख्स का नाम आतिफ पोपेरे है, जिसने अपनी 24 साल की पत्नी बुशरा पोपेरे की हत्या की थी। उसके साथ-साथ एक अन्य व्यक्ति को भी इस हत्या में जिम्मेदार ठहराया गया है।
दुबई के सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले हफ्ते ही आतिफ की दया याचिका खारिज की थी। अब आतिफ के सामने सिर्फ एक ही उम्मीद है, बुशरा की मां। अगर बुशरा की मां उसे माफ कर दे तो इस भयानक सजा से मुक्ति मिल सकती है।
हालांकि, बुशरा की मां उमा धनंजयन का कहना है कि अभी तक उन्हें दया याचिका का कोई दस्तावेज नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें दस्तावेज मिलता भी है तो वह दया याचिका को खारिज कर देंगी।
कॉलेज में मिले, हुआ प्यार
आतिफ पोपेरे और बुशरा की मुलाकात मुंबई के मातुंगा कॉलेज में पढ़ाई के दौरान हुई थी। उस समय बुशरा का नाम मिनी धनंजय था। शादी के बाद मिनी ने अपना नाम बदलकर बुशरा रख लिया।
दोनों के बीच 2008 में प्यार हुआ था, जिसके बाद उन्होंने शादी कर ली। 2009 में उनकी एक बच्ची भी हुई। इसके कुछ समय बाद आतिफ दुबई चला गया, जहां वह एक दुकान में मैनेजर की नौकरी करने लगा।
इसके दो साल बात बुशरा भी आतिफ के पास मुंबई चली गई। जब उनकी बच्ची तीन साल की हो गई, तो उसे रायगढ़ में रह रहे अपने माता-पिता के पास भेज दिया गया।
बुशरा को दी जाती थीं गंदी गालियां
2013 में बुशरा के माता-पिता ने उसके भाई निगिल से बात की, जो दुबई में ही रहता था और अपनी बेटी के बारे में पता करने को कहा। जब निगिल ने पता किया तो 13 मार्च 2013 को पुलिस ने बुशरा की मौत की पुष्टि की और शव पाए जाने की बात बताई।
बेटी और दामाद के दुबई जाने के बाद बुशरा के माता-पिता केरल चले गए थे। उन्होंने कहा कि बुशरा ने कभी भी अपने रिश्ते में किसी तरह की परेशानी के बारे में नहीं बताया था।
हालांकि, बुशरा की मां ने कहा कि उसके ससुराल वाले उसे गंदी गालियां दिया करते थे और परेशान करते थे।
बुशरा को मारकर भारत भाग आया
बुशरा की लाश मिलने के बाद आतिफ अपने हत्यारे साथी के साथ भारत भाग आया। कुछ समय बाद वह फिर से सऊदी गया और जून 2013 में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
अब बुशरा के माता-पिता अपनी बेटी की 6 साल की मासूम के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। वे चाहते हैं कि उसे उनके सुपुर्द किया जाना चाहिए, न कि आतिफ के माता-पिता के पास छोड़ना चाहिए।