भाई को मिले बहन की गैंगरेप के वीडियो से जहां परिवार सन्न है। वहीं अब तक उस मासूम बच्ची का भी कुछ पता नहीं चला है जो रेप पीड़िता के साथ थी। मामला अब एसटीएफ के हवाले है। वहीं मामले को नजरअंदाज करने वाले आरोपी इंस्पेक्टर और दरोगा को सस्पेंड कर दिया गया है।
पीलीभीत की लापता युवती के साथ गैंगरेप वीडियो मिलने के बाद पूरा पुलिस महकमा हरकत में आ गया। आईजी विजय सिंह मीना और डीआईजी आरकेएस राठौर ने पीलीभीत के अधिकारियों और पीड़ित पक्ष को सुनने के बाद पूरे मामले की समीक्षा की है।
मामले में लापरवाही बरतने और इसे दबाने के आरोप में थाना सुनगढ़ी के प्रभारी निरीक्षक बृजेश सिंह और असम रोड चौकी इंचार्ज इंद्रजीत सिंह भदौरिया को निलंबित कर दिया गया है और मामले की जांच और युवती का पता लगाने के लिए आईजी ने एसटीएफ को भी लगा दिया है।
यह जानकारी मिलने पर कि वीडियो पुरानी हो सकती है, इसे फारेंसिक जांच के लिए लखनऊ भेज दिया गया है। इस बीच जांच में जुटी टीमों ने लड़की के पति और परिवार को वीडियो भेजने वाले बरेली के युवक समेत दस लोगों को हिरासत में ले लिया है।
बुधवार को सुबह ही आईजी विजय सिंह मीना और डीआईजी आरकेएस राठौर ने लड़की के पिता और भाई को बरेली बुला लिया था। मुरादाबाद से आए वैज्ञानिक डॉक्टर अरुण कुमार की मौजूदगी में लड़की के पिता को पुलिस के एक आला अफसर ने वीडियो क्लिपिंग दिखाई। लड़की के पिता ने कहा कि वीडियो में उन्हीं की बेटी है, लेकिन वीडियो क्लिपिंग में जो कपड़े वह पहने हैं वह उसके नहीं हैं।