मुंबई में अब हर एक गुंडे पर एक पुलिस वाला तैनात होगा। पुलिस की नई नीति के तहत लोकल गुंडों पर लगाम लगाने की तैयारी की गई है। मुंबई पुलिस को पूरा यकीन है कि इस कवायद से मायानगरी में क्राइम फ्री हो पाएगी।
नई नीति के तहत पुलिस के सिपाही हर एक अपराधी की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखेंगे। यानी खाकी के साए में मायानगरी के गुंडों की खैर नहीं होगी।
मिड-डे की खबर के मुताबिक मुंबई पुलिस का ये फैसला उस संदेह की बुनियाद पर है कि कहीं बाहरी आतंकी लोकल के गुंडों का ब्रेनवॉश कर उन्हें आतंकी न बना दें।
पुलिस के इस फैसले के मुताबिक पुलिस के सिपाही नियमित तौर पर गुंडों से मिलेंगे, उनके संबंधों और तमाम कार्यकलापों पर नजर रखेंगे, यहां तक की उनकी कमाई की जानकारी भी लेंगे।
'देश विरोधी ताकतें कहीं गुंडों को बहका न दें इसलिए लिए ऐसा फैसला'
दक्षिणी मंडल के एसीपी प्रताप दिघावकर मीडिया को बताया कि हम सभी गैंग के गुंडों पर निगरानी रख रहे हैं। इनमें कुछ जेल की हवा भी काट चुके हैं और उन्हें बरगलाया जा सकता है। बाहरी ताकतें उन्हें हमारे देश की शांति भंग करने के लिए इस्तेमाल भी कर सकती हैं। इन सभी अपराधियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मकोका, पोटा और टाडा आदि के तहत मुकदमे चल रहे हैं। इसलिए इन अपराधियों को ऐसे छोड़ने का जोखिम नहीं उठा सकते।
एक गुंडा एक सिपाही नीति के तहत गुंडों को हर आठ दिन में उसके लिए तैनात किए गए सिपाही को पूरी जानकारी देनी होगा और हर पंद्रह दिन में उसे पुलिस स्टेशन में भी हाजिरी देनी होगी। यही नहीं, पुलिस स्टोशनों में नियमित तौर पर हर गुंडे की तस्वीर भी बदली जाएंगी। इसके अलावा हर गुंडे पर तैनात सिपाही की ये जिम्मेदारी होगी कि वो उसकी हर हरकत पर पैनी नजर रखे।
पुलिस ने हालांकि अभी गुंडों की लिस्ट जारी नहीं की है, लेकिन माना जा रहा है कि डी कंपनी, जेजे मार्ग, वीपी रोड और पाइधोनी के ज्यादातर गुंडों के नाम फेहरिस्ट का हिस्सा होंगे।
गुंडों की गतिविधियों को आंकते वक्त आत्मरक्षा के लिए हर सिपाही के पास पिस्तौल होगी। वहीं इस मुहिम से कई पुलिस वाले खुश दिखे और उन्होंने तहे दिल से इसका स्वागत किया।