उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ के तरवां थाने के ऐराकला फद्दुपुर गांव में बीती छह फरवरी को हुई मजदूर की हत्या की साजिश आगरा जेल में बंद विधायक मुख्तार अंसारी ने रची थी।
उसके कहने पर ही गोरखपुर जेल में बंद उसके गुर्गों श्यामबाबू पासी और अनुज कन्नौजिया ने शूटरों के जरिए वारदात को अंजाम दिलवाया था।
पूरी योजना मऊ में हुई दो हत्याओं के दो गवाहों को फंसाने के लिए रचा गया, ताकि ये गवाही नहीं दे सकें।
गुरुवार को तीन हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के बाद पत्रकारों के समक्ष इसका खुलासा पुलिस अधीक्षक अनंत देव ने किया। पुलिस अधीक्षक ने बताया इस मामले में मुख्तार अंसारी को हत्या की साजिश रचने का आरोपी बनाया गया है।
पुलिस अधीक्षक अनंत देव ने बताया कि छह फरवरी को फद्दूपुर गांव में हत्या की घटना को अंजाम देने वाले तीन बदमाशों को पुलिस ने बृहस्पतिवार को रासोपुर बाजार से मुठभेड़ में पकड़ा तो इन्होंने घटना को अंजाम देने में अपनी संलिप्तता के साथ साजिश में मुख्तार के शामिल होने की बात स्वीकारी।
गौरतलब है कि फद्दूपुर गांव के पास छह फरवरी 2014 की रात बाइक सवार बदमाशों ने मजदूरों के टेंट में फायरिंग की थी, जिससे मजदूर रामअकबाल बिंद की मौत हो गई और एक मजदूर घायल हो गया। ये मजदूर रासेपुर बाजार से गाजीपुर की तरफ जाने वाली सड़क के निर्माण में लगे थे। इसका ठेका मऊ के ठेकेदार राजेश सिंह उर्फ राजन ने लिया था।
एसपी ने बताया कि मजदूर की हत्या के बाद ठेकेदार राजेश सिंह ने ही नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें मऊ के अशोक सिंह और हरेंद्र सिंह सहित बदमाश श्यामबाबू पासी को भी आरोपित किया गया था।
जांच में पता चला कि आरोपी अशोक और हरेंद्र घटना के समय पुलिस की सुरक्षा में थे। ये दोनों क्रमश: 29 अगस्त, 2009 में हुए ठेकेदार मन्ना सिंह हत्याकांड और 19 मार्च, 2010 को हुए रामसिंह मौर्य हत्याकांड में गवाह हैं।
जबकि मजदूर की हत्या मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने वाला ठेकेदार राजेश सिंह, अनुज कन्नौजिया, विधायक मुख्तार अंसारी समेत 13 लोग इसमें आरोपी हैं।