मदनपुर गैंगरेप के सभी पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही सभी पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। शुक्रवार को कोर्ट ने आरोप तय कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कोर्ट ने गैंगरेप पीड़िता के वकीलों की दलीलें सुनीं। पीड़िता के वकील संजय शर्मा और सहायक अभियोजन अधिकारी फौजदारी रवींद्र शर्मा ने कोर्ट से दोषियों को कम से कम आजीवन कारावास देने की मांग की। कहा, मदनपुर गैंगरेप जघन्य अपराध की श्रेणी में है। अभियुक्त पक्ष के पांच वकीलों ने कोर्ट से मुलजिमों की उम्र, कैरियर और परिवार की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कम से कम सजा की मांग की।
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायमूर्ति ने पांचों अभियुक्तों को आजीवन कारावास और 60-60 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा का ऐलान होते ही पुलिस अभियुक्तों को जेल ले गई।
साढ़े तीन माह तक किया सवालों का सामना
दरिंदगी की शिकार बिटिया को सैल्यूट। दरिंदों को सजा दिलाने का उसका जज्बा फौलादी निकला। हर किसी को उसके फौलादी जज्बे ने कायल कर दिया है। खुद वकील पीड़िता के साहस का लोहा मान गए।
दरअसल, पीड़िता ने अभियुक्तों के धुरंधर पांच वकीलों का साढ़े तीन माह तक सामना किया। केस की लगातार और लंबी अवधि की सुनवाई में अधिवक्ताओं के असहज करने वाले सवाल पर वह जरा भी नहीं डिगी। एक भी तारीख मिस नहीं की। वहशीपन की कोर्ट में खुद क्लीपिंग देखी और जिरह में शामिल रही। वह आरोपियों से कई बार मिली और धमकियों के आगे भी नहीं झुकी।
अपने मुवक्किल को बचाने के लिए पांच अधिवक्ताओं ने पीड़िता को कई बार सवालों में उलझाया लेकिन वह फौलादी जज्बे के साथ डटी रही।
वकीलों ने दी निःशुल्क कानूनी सेवाएं
पीड़िता, वकीलों के सवालों का तर्कपूर्ण जवाब देती गई रही। वह एक भी सवाल या घुमावदार बात पर न गुमराह हुई और न ही डिगी। पहली लड़ाई में दरिंदों को सलाखों के पीछे डलवा दिया। खास बात यह है कि कानूनी लड़ाई में बिटिया की हिम्मत बंधाने एक भी महिला संगठन सामने नहीं आया।
सिर्फ वकील संजय शर्मा और सरकारी वकील रवींद्र शर्मा ही ऐसे थे, जिन्होंने इस केस में कदम कदम पर उसका साथ दिया।
परिजनों को साथ देने के लिए प्रेरित किया। वकीलों का तर्क था कि अगर इस केस में सजा हो गई तब बाकी बेटियों पर दरिंदगी करने से बाकी दरिंदे कई बार सोचेंगे। उन्होंने पीड़िता को निःशुल्क कानूनी सेवाएं दीं।
वीडियो बनाकर खुद ही खोदी कब्र
दरिंदों ने वीडियो बनाकर खुद ही अपनी सजा की पटकथा लिख ली थी। बिटिया को जिस समय हवस का शिकार बनाया जा रहा था, उस समय इज्जत उछालने के लिए वीडियो बना ली लेकिन उनको नहीं पता था कि एक दिन यही वीडियो दूसरे कि इज्जत उछालने से ज्यादा खुद को जिंदगी भर जेल में रहने के लिए सबूत के तौर पर पेश होगी।
अभियुक्तों ने सुनवाई के दौरान कई बार इसका जिक्र भी किया कि उस समय अगर वीडियो बनाने की गलती नहीं की होती तब आज शायद इतनी बड़ी सजा नहीं मिलती।