नशे में घुत होकर वो बेधड़क महिला बोगी में चढ़ गया और पास बैठी तीन महिलाओं को छेड़ने लगा। उसने एक महिला के कपड़े फाड़ने की कोशिश की तो एक के बाल पकड़कर धक्का दे दिया। मनचले की बदसलूकी से कंपार्टमेंट में हड़कंप मच गया जिसकी सुगबुगाहट दूसरी बोगी में सफर कर रही लेडी सिंघम के कानों में पड़ी। और फिर जो हुआ वो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था।
मामला मायानगरी मुंबई का है। जीआरपी की महिला पुलिस में तैनात नायक संगीता दुबे ने एक मनचले को इस अंदाज में सबक सिखाया कि उनके चर्चे तो दूर-दूर तक हैं ही, उन्हें लोग 'लेडी सिंघम' भी कहने लगे हैं।
संगीता के मुताबिक वादी बुंदेर स्थित जीआरपी के हेड ऑफिस में उन्हें रोजाना फाइलें आदि लेकर जाना होता है। जिसके चलते वो मुंबई के दहानू से चर्चगेट जाने वाली फास्ट लोकल ट्रेन के सेंकेंड क्लास में वसई रोड से चढ़ी थीं। लेकिन जैसे ही ट्रेन ने बोरीवली स्टेशन को पार किया तो उन्हें फर्स्ट क्लास में कुछ हलचल सुनाई दी।
'लेडी सिंघम' की सूझबूझ और बहादुरी ने किया कमाल
दरअसल, नशे में धुत एक मनचला महिलाओं को छेड़ रहा था। मनचले का नाम राजेश विश्वकर्मा बताया जा रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक आरोपी महिला बोगी में घुस गया और तीन महिलाओं के पास बैठकर घिनौनी हरकतें करने लगा।
आरोपी ने तीनों में एक महिला के कपड़े खींचने की कोशिश की तो एक महिला के बाल खींचकर उसे धक्का दे दिया। आरोपी की इस हरकत से तीनों महिलाएं सहम गई। लेकिन बोगी में सफर कर रही दूसरी महिलाओं ने विरोध शुरू कर दिया। इस पर आरोपी हिंसक हो गया और एक महिला पर हमला बोल दिया।
दूसरी बोगी में सफर कर रही जीआरपी की संगीता को जब माजरा पता चला तो उन्होंने पीड़ित महिलाओं से कहा कि वो कैसे भी करके मनचले को दो बोगियों के पास वाले ज्वाइंट पर लाएं। राजेश जिस महिला के कपड़े फाड़ने की कोशिश कर रहा था उसने राजेश को धक्का दिया जिससे वो ज्वाइंट के पास आ गया।
चलती ट्रेन में जोखिम लेकर दबोच लिया मनचले को
अब लेडी सिंघम की बारी थी। संगीता ने लोहे की रॉड का सहारा लेकर राजेश को धर दबोचा। लेकिन चलती ट्रेन में ये बेहद जोखिम भरा था। क्योंकि ट्रेन चल रही थी और संगीता ने राजेश को खुद की जान पर खेलकर पकड़ा हुआ था। ऐसे में पीड़ित महिला ने देर न करते हुए अपना स्कार्फ निकाला और मनचले को लोहे की रॉड से बांध दिया।
संगीता और पीड़ित महिला ने आरोपी राजेश को अंधेरी स्टेशन में ट्रेन के रुकने तक दबोचे रखा। जहां जीआरीपी स्टाफ ने आरोपी को उसके असल ठिकाने यानी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। इस दौरान संगीता की एक बांह पर भी चोट के निशान आए हैं।
संगीता की इस बहादुरी की बहादुरी से जीआरपी महकमा गदगद है। तो वहीं संगीता की बहादुरी का ये कारनामा पहली दफा नहीं हैं, पहले भी साल 2012 में उन्होंने बैग चुराने वाली एक बिहारी गैंग को बेहद सूझबूझ का परिचय देते हुए रंगे हाथों हाथों पकड़ लिया था।
संगीता दुबे राज्य स्तरीय कबड्डी खिलाड़ी हैं तो कराटे में वो नेशनल लेवल की प्लेयर हैं। उनकी 18 साल की एक बेटी और 14 साल का एक बेटा है। पति दहिसर में स्टेशनरी की दुकान चलाते हैं। अब तो घरवाले भी उन्हें लेडी सिंघम कहकर ही बुलाते हैं।