घर हो या बाहर महिलाएं कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। कभी घर के अंदर कोई हैवान बन जाता है तो कभी किसी के साथ सरेराह दरिंदगी होती है। चीन में हुई एक घटना इसका बेहद खौफनाक उदाहरण है, जिसमें घर से स्कूल के लिए निकली लड़की अचानक लापता होती है और बाद में मिलती है उसकी लाश।
16 साल की पाइ शिआओ येन, ताइवान की चर्चित टीवी होस्ट और अभिनेत्री पाइ पिंग-पिंग और जापानी लेखक इक्की काजीवारा की बेटी थी। 14 अप्रैल 1997 को वह सुबह स्कूल के लिए निकली तो फिर वापस नहीं लौटी। उसका अपहरण कर लिया गया।
उसके परिजनों को अपहर्ताओं ने करीब 30 करोड़ रुपए ($5,000,000) की फिरौती मांगी। उन्होंने फिरौती की चिट्ठी के साथ उनकी बेटी की कटी हुई छोटी उंगली और तस्वीर भी भेजी। घटना का पता चलते ही पूरे शहर में हड़कंप मच गया था।
हत्या के 10 दिन बाद मिली लड़की की लाश
यह मामला बड़ी तेजी से चर्चा में आया और देखते ही देखते मीडिया रिपोर्ट्स में किडनैपर्स के बारे में काफी कुछ सामने आने लगा। 23 अप्रैल को किडनैपर ने कई बार फिरौती लेने के ठिकाने और समय बदले क्योंकि उन्हें शक हुआ कि पुलिस और मीडिया लड़की के परिजनों के पीछे है।
बाद में अपहर्ताओं ने पुलिस से 11 दिन का समय मांगा और करीब 20 बार अपनी लोकेशन बदली ताकि पकड़े न जा सकें। हालांकि आखिरकार पुलिस ने बातचीत करने के तरीके से उनका ठिकाना खोज निकाला और सीधी मुठभेड़ के बाद एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जबकि दो भागने में कामयाब रहे।
इसके बाद 28 अप्रैल को लड़की की क्षत-विक्षत लाश एक खाई में पड़ी हुई मिली। तहकीकात में पता चला कि उसकी लाश मिलने से करीब 10 दिन पहले उसकी हत्या की गई थी। हालांकि लाश मिलने के बाद भी अपहर्ताओं ने फिरौती मांगनी बंद नहीं किया और वे किसी लड़की की आवाज सुनाकर उन्हें भरोसा दिलाने की कोशिश में लगे रहे कि बच्ची जिंदा है।
हत्या से पहले किया था टॉर्चर
मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ कि लड़की की हत्या से पहले उसे बुरी तरह टॉर्चर किया गया था। उसकी एक न्यूड तस्वीर लीक हो गई थी, जिसे चाइना टाइम्स ने प्रकाशित भी किया था। इस वारदात में 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन तीन मुख्य आरोपी भागने में कामयाब रहे।
एक अन्य शख्स को भी गिरफ्तार किया गया लेकिन सबूतों के अभाव में उसे सजा नहीं हो सकी। आरोपियों को पकड़ने में जुटी पुलिस को आदेश दिया गया था कि उन्हें देखते ही गोली मार दी जाए लेकिन वे किसी को नहीं दिखे।
जून 1997 में उन्होंने ताइपेइ काउंटी के काउंसलर को अगवा किया और अगस्त में एक कारोबारी को। 19 अगस्त को तीनों ताइपेइ में ही एक पेट्रोल पंप पर तैनात पुलिसकर्मियों ने देखा। दोनों तरफ से फायरिंग शुरू हो गई, जिसमें एक आरोपी लिन को छह गोलियां लगीं। पुलिस से बचने के लिए उसने खुद को गोली से उड़ा लिया। इस दौरान एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई जबकि दूसरा घायल हो गया।
आखिरकार फंसे आरोपी, एक को मिली फांसी
सुबह 12 बजे हुई इस मुठभेड़ के तुरंत बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और आरोपियों की तलाश शुरू की लेकिन कुछ हाथ नहीं आया। 23 अक्तूबर को दो अन्य आरोपियों काओ और चेन ने एक प्लास्टिक सर्जन, उसकी पत्नी और नर्स की गोली मारकर हत्या कर दी।
वे उनके पास प्लास्टिक सर्जरी कराने गए थे, लेकिन जब मना किया गया तो उन्होंने उनकी हत्या कर दी। नबंवर में पुलिस ने उनकी तलाश तेज की और आखिरकार काओ उनके चंगुल में फंसा खुद को पुलिस से बचाने के लिए उसने भी गोली मार ली।
इस मामले में आखिरी अपराधी चेन ने घटना के एक दिन बाद 18 नबंबर को साउथ अफ्रीका के सैनिक के घर धावा बोला और उसके परिवार को बंधक बना लिया। हालांकि बाद में उसने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। दिसंबर 1998 में उसे किडनैप, हत्या और यौन उत्पीड़न के कई आरोपों में दोषी ठहराया गया और 6 अक्तूबर 1999 को उसे मौत की सजा दी गई।
इन आरोपियों की करतूतों के चलते ताइवान में धरना-प्रदर्शन होते रहे और बवाल भी बढ़ता रहा। इन बदमाशों के कारण पुलिस प्रशासन से लेकर राजनेताओं तक की कुर्सी हिल गई। कई अधिकारियों और नेताओं ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपना इस्तीफा भी पेश किया था।