निर्भया के सामूहिक बलात्कार और हत्या के दोषियों में से एक, अपराध के समय 17 साल का था और उसकी रिहाई पर हो रही बहस कितनी वाजिब है।
इस सारी बहस के पीछे है डर। इस मामले में एक पक्ष का ये मानना है कि सामूहिक बलात्कार या हत्या जैसा जघन्य अपराध का दोषी अगर 16-17 साल का भी है तो वह किसी वयस्क से कम नहीं।
ये तर्क देने वालों के मुताबिक ऐसा किशोर ना सिर्फ कड़ी सजा का हकदार है बल्कि सजा खत्म होने के बाद उसके दोबारा अपराध करने कि गुंजाइश भी है। पर इस धारणा के पीछे ना कोई शोध है ना अपराध की दर के आंकड़े।
भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक पिछले दस सालों के अपराध के आंकड़े बताते हैं कि भारत के कुल रिकॉर्डिड अपराधों में से लगभग एक प्रतिशत में ही नाबालिग अभियुक्त हैं।
भारत में कितने हैं नाबालिग अपराधी
इसके अलावा एक बार अपराध करने के बाद कितने नाबालिग दोबारा अपराध करते हैं या उनमें सुधार हो जाता है, इस पर आज तक कोई ठोस शोध नहीं किया गया है। ये भी गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र की बाल अधिकारों पर बनी कनवेंशन ये कहती है कि 18 साल की उम्र से कम के किशोरों को नाबालिग ही माना जाए। भारत ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं।
कनवेंशन ये भी कहती है कि ऐसे बाल-अपराधियों को वयस्कों से अलग समझा जाए और समाज में उनके पुनर्वास के लिए सरकारें हर कदम उठाएं ताकि इन किशोरों पर किसी तरह का कोई कलंक ना लगे।
लेकिन इससे अलग, महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने प्रस्तावित विधेयक में जघन्य यौन अपराधियों का एक ‘रेजिस्टर’ बनाए जाने का प्रस्ताव रखा है।
ये लिस्ट पुलिस और न्याय से जुड़ी अन्य एजंसियों के पास रहेगी ताकि ऐसे अपराधियों पर आजीवन नजर रखी जा सके और जरूरत पड़ने पर जानकारी सार्वजनिक की जा सके।
विदेशों में क्या है यौन अपराधियों की स्थिति
इसकी प्रेरणा ब्रिटेन और अमरीका में लागू ऐसी ही ‘सेक्स ओफेन्डर रेजिस्ट्री’ से ली गई है। ब्रिटेन में इस ‘रेजिस्टर’ के तहत यौन अपराध करने वाले वयस्क और नाबालिग, सभी के नाम, पते, जन्म तिथि और नैशनल इंश्योरेंस नंबर पुलिस को दिए जाते हैं।
अगर ये लोग कहीं जाएं या अपना पता बदलें तो इन्हें खुद पुलिस को ये जानकारी देनी होती है वर्ना उन्हें फिर जेल हो सकती है। हालांकि ये नाम सार्वजनिक नहीं किए जाते हैं।
अमरीका में भी ‘सेक्स ओफ़ेन्डर रेजिस्ट्री’ बनाई गई है। 18 राज्यों के अलावा बाकि राज्यों में नाबालिग अपराधियों के नाम इसमें नहीं रखे जाते।
पर ये ‘रेजिस्ट्री’ सार्वजनिक है यानि इसमें नया नाम आते ही, उस व्यक्ति के घर के आसपास रहनेवालों को चिट्ठी भेजकर उस रिहा हुए अपराधी की सूचना दी जाती है।
ब्रिटेन और अमरीका में क़ानून के सामने बालिग माने जाने की उम्र सीमाएं अलग हैं और इनको दिए जाने वाली सज़ा भी अलग-अलग है।