रामगंगा विहार से चार साल की मासूम बेटी गौरांशि को लेकर गायब हुई बर्तन कारोबारी प्रतीक अग्रवाल की पत्नी निधि को आखिरकार पुलिस ने बरामद कर लिया।
प्रेमी के साथ वह कश्मीर के गुलमर्ग में रंगरेलियां मनाते मिली। जबकि उसने खुद को बेटी की बीमारी से आहत दिखाकर पति के नाम पत्र छोड़ा था। शनिवार को सिविल लाइंस थाने में पूरे दिन हाईप्रोफाइल ड्रामा चला। आखिर में निधि को मायके वालों के सुपुर्द कर दिया गया। बेटी भी उसी के साथ रहेगी।
वह सोमवार की सुबह थी। जब रामगंगा विहार में रहने वाले जीलाल स्ट्रीट के मशहूर बर्तन व्यापारी महावीर प्रसाद अग्रवाल के घर पर हड़कंप मच गया था।
उनका बेटा प्रतीक गोवा में था और बहू निधि, चार साल की गौरांशि के साथ लापता थी। कमरे में एक पत्र छोड़ा था। जिसमें लिखा था कि अब वह बेटी के साथ कभी लौटकर नहीं आएगी। वह उसकी बीमारी से काफी आहत हो गई है। दरअसल, गौरांशि की आंखों की बीमारी को डाक्टरों ने लाइलाज बताया था।
परिवार वालों ने सभी जगह तलाश किया। थाने में गुमशुदगी लिखाई। गुरुवार को निधि के कश्मीर में होने की बात सामने आई। परिवार वाले पुलिस के साथ पहुंचे। तब गुलमर्ग के एक होटल में निधि, अपने प्रेमी अंकित गुप्ता के साथ मिली। दोनों एक ही कमरे में थे।
जेठ को देखते ही निधि ने अभद्रता शुरू कर दी। किसी तरह पुलिस निधि, अंकित और मासूम बच्ची को लेकर आई। शनिवार को पूरे दिन दोनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर थाने में हड़कंप मचा रहा। ससुराल वालों ने निधि को अपनाने से इंकार कर दिया था। शाम को शांति भंग में दोनों का चालान करके पुलिस ने मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। मजिस्ट्रेट ने निधि को उसके मायके वालों को सौंप दिया।
निधि बोली, मेरी भावनाएं नहीं समझ रहे
थाने में खड़ी एक आटो में बैठी निधि रोते हुए मीडियाकर्मियों से रूबरू हुई। उसने कहा कि किसी ने उसकी भावनाओं को नहीं समझा। शादी से पहले न तो मां-बाप समझते थे और न ही शादी के बाद पति और ससुराल वालों ने तवज्जो दी। उसने कहा कि जहां भी रहेगी, बेटी को साथ रखेगी।
पांच साल पहले हुई थी निधि की शादी
बरेली के सरकारी डाक्टर रहे सीपी अग्रवाल ने अपनी बेटी निधि की शादी पांच साल पहले की थी। निधि एमकॉम तक पढ़ी है, जबकि प्रतीक ने भी ग्रेजुएशन की है। इसके बाद उन्होंने पिता का बिजनेस संभाल लिया। परिवार में कोई कमी नहीं थी। फिर भला निधि ने यह कदम क्यों उठाया? किसी को समझ में नहीं आ रहा।
नारी निकेतन जाने को तैयार हो गई
पुलिस ने जब शांति भंग की धारा में दोनों का चालान किया और मायके व ससुराल वालों ने निधि को अपनाने से मना कर दिया तो वह नारी निकेतन जाने को भी तैयार हो गई। उसने साफ कहा कि उसे किसी की जरूरत नहीं है। बेटी को अकेले रहकर संभाल लेगी। अपना गुजर बसर भी कर लेगी।
प्रेमी चार लाख के मुचलके पर पाबंद
मजिस्ट्रेट ने प्रेमी अंकित गुप्ता को चार लाख रुपये के निजी मुचलके पर पाबंद कर दिया। ताकि बाद में वह निधि, उसके ससुराल वाले या मायके वालों को कोई नुकसान न पहुंचा सके। पुलिस के अनुसार निधि, बेटी को लेकर मां-बाप के साथ बरेली चली गई, जबकि अंकित अपने घर चला गया।
बदनामी से आहत पिता हुए बदहवास
निधि के डाक्टर पिता सीपी अग्रवाल अपनी बदनामी से आहत होकर थाने में ही बदहवास से हो गए। पत्नी और बेटा उन्हें संभालने की कोशिश करते रहे। उन्होंने कहा कि इसने तो हम पर ही सवाल खडे़ कर दिए। अगर पता होता कि शादी से पहले उसका अंकित से कोई रिश्ता है तो क्यों हम उस (प्रतीक) परिवार से रिश्ता जोड़ते। कहा कि उन्होंने बड़ी बेटी से अंकित की शादी की बात की थी, लेकिन तब अंकित ने बड़ी बेटी को अपनी बहन बताकर मना कर दिया। प्रतीक के पिता भी बदनामी के डर से काफी दुखी थे। उनकी आंखों से बार-बार आंसू छलक आते थे।
उसी की वजह से चार परिवारों में आया भूचाल
कांठ रोड पर पालीटेक्निक में लेक्चरर के पद पर कार्यरत अंकित गुप्ता की वजह से ही चार परिवारों में भूचाल आ गया। चार दिन में उसने दो शादियां की थीं। लेकिन दोनों पत्नियों को अपनी शादीशुदा जिंदगी के बारे में नहीं बताया। गुलमर्ग में दोनों पति-पत्नी बनकर रुके थे। पुलिस के पहुंचने पर अंकित ने 24 नवंबर का मैरिज सर्टिफिकेट भी दिखाया।
अंकित के पिता राकेश गुप्ता सरकारी सेवा से पिछले साल की रिटायर हुए थे। लखनऊ में उनका घर है। अंकित के मौसा पिछले 17 सालों से निधि के मायके में किराए पर रहते रहे। इसी वजह से अंकित की निधि से नजदीकियां बढ़ीं। निधि ने बताया कि शादी के काफी पहले से उनके बीच अफेयर चल रहा था। लेकिन परिवार वालों ने पांच साल पहले उसकी शादी मुरादाबाद में तय कर दी। दबाव होने से वह कुछ बोल नहीं पाई।
दो साल पहले अंकित भी मुरादाबाद पालीटेक्निक में लेक्चरर बन गया। रामगंगा विहार एफ ब्लाक में उसने किराए का कमरा लिया। बाद में निधि के घर आने जाने लगा। चार साल की गौरांशि उसे मामा कहती है। बीती 24 नवंबर को उसने निधि से शादी की, इसके बाद 28 को परिवार वालों की मर्जी से उसने हल्द्वानी में दूसरी शादी की। प्रतीक के परिवार वालों ने कहा कि अब वह हर्गिज निधि को नहीं अपनाएंगे। अगर वह माफी मांग लेती तो शायद एक बार सोचते भी।
थाने में मना गौरांशि का बर्थडे
वह बेसब्री से अपना बर्थ डे मनाने की सोच रही थी। मां ने कश्मीर में बर्थ डे सेलीब्रेट करने की बात कही थी। लेकिन उस बेचारी का जन्मदिन न कश्मीर में मना और न ही उसके घर में। देर रात तक वह थाने में मां-बाप और परिवार वालों के साथ गुमसुम बैठी रही।
गौरांशि ने बताया कि मम्मी ने उससे कहा था कि वे सब उसका बर्थडे कश्मीर में रीवर बोट पर मनाएंगे। पापा (प्रतीक) को फोन कर दिया है और वह भी वहीं आ जाएंगे। तीन दिन तक पापा से बात नहीं हुई तो उसने मम्मी से जिद भी की, लेकिन मां ने डांटकर चुप करा दिया। परिजनों की मानें तो जिस मां ने प्रेमी के लिए बेटी की बीमारी का सहारा लिया। सुसाइड करने की बात कही, वह बच्ची की जिंदगी के लिए भी खतरा हो सकती थी। लेकिन इससे पहले ही परिजन पहुंच गए।
शनिवार को भी पूरे दिन गौरांशि थाने में रही। कभी मां के पास जाती तो कभी पापा के पास। लेकिन वह मासूम अपने मां-बाप के बीच आ चुकी नफरत की दीवार से अंजान ही रही। किसी ने उसे कुछ बताया भी नहीं। पुलिस हिरासत में मौजूद अंकित को वह मामा कहकर ही बुलाती रही।