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EXCLUSIVE: इंजीनियरिंग-मैनेजमेंट की जाली डिग्रियों से नौकरी

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उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित डा. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी में सिर्फ बीएड ही नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस और मैनेजमेंट की जाली डिग्रियों का भी गोरखधंधा चल रहा है। यह चौंकाने वाला खुलासा इन डिग्रियों के सत्यापन में हुआ है। इसी से पता चला है कि जालसाजी के सहारे कई युवाओं ने विदेशों तक में नौकरी हासिल कर ली है।
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इन्होंने जाली माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी तैयार कराए। इनके सत्यापन के लिए राजपत्रित अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए। इस खुलासे से यूनिवर्सिटी में हड़कंप मचा है।

यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) में विदेशों से महीने भर में 20-25 डिग्रियां सत्यापन के लिए आई। इनमें 2003-04 से लेकर 2012-13 सत्रों की मार्कशीट और डिग्रियां है।
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ये बीटेक, बीई, बीएससी इन कंप्यूटर साइंस, एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स की हैं। भेजने वाली कंपनियां सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका के अलावा बंगलूरू, मुंबई, चेन्नई जैसे शहर की हैं। कंपनियों ने उनके यहां जॉब प्राप्त करने वाले युवाओं मार्कशीट और डिग्री समेत अन्य रिकार्ड ई-मेल के जरिये मांगे।
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4500 बन चुके सहायक अध्यापक

इनमें से कुछ देशों की क्वालिफिकेशन अथॉरिटी ने भी कुलपति से ई-मेल पर इनकी सत्यता की रिपोर्ट मांगी। संस्थान ने संबंधित सत्रों के प्रवेश सूची और फीस रजिस्टर खंगाला तो इनका कोई रिकार्ड नहीं मिला।

कंपनियों को जवाब भेजने के साथ ही संस्थान ने इसकी शिकायत कुलसचिव और कुलपति से भी की है। जांच में यह भी पता चला कि जालसाजों ने संस्थान के विभागाध्यक्ष के नाम से एक्सीलेंट स्टूडेंट के फर्जी पत्र भी बना लिए। सभी मार्कशीट में 70 से 85 फीसदी अंक हैं।

प्रो. मोहम्मद मुजम्मिल, कुलपति ने कहा कि इंजीनियरिंग की मार्कशीट और डिग्री फर्जी पाए जाने की जानकारी है। इसकी सत्यता का पता लगाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

डा. वीके सारस्वत ( निदेशक आईईटी ) विभिन्न कंपनियों की ओर से छात्रों की मार्कशीट और डिग्रियां सत्यापन के लिए आईं थी। जांच करने पर ये संस्थान के छात्र नहीं पाए गए। संबंधित कंपनी और विश्वविद्यालय को सूचित कर दिया है।

4500 बन चुके सहायक अध्यापक
एसआईटी की जांच में यह जानकारी सामने आ चुकी है कि विवि. से जारी बीएड की जाली मार्कशीट से बेसिक शिक्षा विभाग में लगभग 4500 सहायक अध्यापक नियुक्त हो चुके हैं। इसकी रिपोर्ट विभाग को दी जा चुकी है। लेकिन अभी तक  इन पर कार्रवाई नहीं हुई है।
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