बंद दरवाजों के पीछे कितने अमानवीय काम हो जाते हैं पर किसी को पता नहीं चलता। लेकिन जब सामने आते है तो हिला कर रख जाते हैं।
ऐसा ही कुछ हुआ जब एक स्टिंग ऑपरेशन ने डॉक्टरों की पोल खोल कर रख दी। तकलीफ से गुजर रहे लोगों की मदद करने वाले डॉक्टर ही जब उन्हें तकलीफ देने लगें तो हताश होने के सिवा क्या बचता है?
ऐसा ही महसूस किया होगा उन मासूम लड़कियों ने जब उन पर जबरन वर्जिनिटी टेस्ट कराकर खुद को साफ सुथरा साबित करने का दबाव बनाया गया होगा। इस काम को अंजाम दिया कई महिला डॉक्टरों ने।
मामला है स्वीडन देश का जहां कई धार्मिक परिवार अपनी लड़कियों का उनकी मर्जी के खिलाफ वर्जिनिटी टेस्ट करा रहे हैं ताकि वे यह साबित कर सकें कि उनकी बेटियां 'पवित्र' हैं।
डेलीमेल की खबर के मुताबिक मामले का खुलासा तब हुआ जब स्वीडेन के न्यूज चैनल टीवी4 की दो महिला पत्रकार हिडेन कैमरा लगाए कई क्लीनिक में गईं।
उनमें से एक 17 साल की लड़की और दूसरी उसकी चाची बनी थी। फुटेज में साफ दिख रहा है कि चाची अपनी भतीजी का टेस्ट कराना चाहती है और वर्जिनिटी सर्टिफिकेट मांग रही है जबकि लड़की करवाने से मना कर रही है।
बच्चियों का भी टेस्ट करने से नहीं चूके डॉक्टर
फुटेज के दूसरे दृश्य में एक महिला डॉक्टर इस बात पर जोर देते दिखी कि उसने कई लड़कियों का टेस्ट किया है जिनमें से कुछ बच्चियां भी थीं। इसी बीच एक असल पीड़ित लड़की सारा ने भी चैनल के साथ अपना दुख बांटा।
लड़की ने बताया कि उसके परिवार ने 13 साल की उम्र में उसके ही एक रिश्तेदार भाई से उसकी शादी करा दी थी और 15 साल की उम्र में टेस्ट करवाया। इस टेस्ट को लड़की अपने साथ हुआ बड़़ा अत्याचार मानती है।
अपनी स्थिति समझाते हुए सारा कहती है,'' मुझे आज भी शर्मिंदगी महसूस होती है क्योंकि कोई सच्चाई नहीं देख पा रहा। मुझे नहीं पता दूसरे लोग क्या सोचते हैं लेकिन ऐसी कोई चीज नहीं है जो इसे सही साबित कर सके। किसी को भी बिना मेरी मर्जी मेरा टेस्ट करने की इजाजत नहीं है, मुझे घिन महसूस होती है।''
महिलाओं के लिए लड़ने वाले देश में ही हुआ ऐसा काम
स्वीडन के राजनेता इस खुलासे से इतने चिंतित हैं कि वे यूरोप की संसद मे इस मामले को उठाना चाहते हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता लाइसेल गर्न्टहॉल्ट्स का कहना है,'' ऐसा देश जिसने वैश्विक स्तर पर महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने की बात रखी, वहां ऐसे मामलों का सामने आना बहुत हैरान करता है।''
टीवी4 की एक प्रवक्ता का कहना था कि ऐसे टेस्ट पूरी दुनिया में कई देशों में होते हैं। यह मामला पिछले कुछ दिनों से स्वीडन में बहुत गर्माया हुआ है और इसके खिलाफ लोग मोर्चा खोल कर बैठ गए हैं।
वर्जिनिटी इस आधार पर जांची जाती है कि लड़की के वैजाइना में हायमन यानि एक पतली सी झिल्ली जुड़ी हुई है या नहीं। यह झिल्ली पहली बार सेक्स करने के अलावा कसरत करने या कोई गंभीर चोट लगने से भी टूट सकती है। इसलिए हायमन न होने पर इस बात का कोई प्रमाण नहीं हो सकता कि लड़की ने सेक्स किया है या नहीं।