यूपी के मेरठ शहर में एक ऐसा गैंग सक्रिय है, जो चोरी हुए मोबाइल फोन का आईएमईआई नंबर बदलकर फर्जी नंबर डाल देता है। यह खेल देसी ही नहीं, बल्कि विदेशी मोबाइल फोनों पर भी धड़ल्ले से चल रहा है।
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इस गैंग का संपर्क चाईना, यूक्रेन और मलेशिया के हैकरों से भी हैं, जिनकी मदद से ये विदेशों में ही या भारत आने वाले विदेशी मोबाइल फोनों के लॉक ब्रेक करने का खेल करते थे। इस काम में शहर के कुछ मोबाइल सेंटरों के नाम भी सामने आए हैं जिनकी छानबीन की जा रही है।
क्राइम ब्रांच ने इस इंटरनेशनल बेस गैंग के दो सदस्य दबोचे हैं। इनके कब्जे से दो लैपटॉप, 18 मोबाइल फोन, आईपॉड और आईएमईआई बदलने के उपकरण बरामद हुए हैं। आरोपियों से बरामद किए गए लैपटॉप में ऐसे डाटा हैं, जो सनसनीखेज होने के साथ-साथ देशहित में भी नहीं हैं।
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सर्विलांस भी नहीं पकड़ पाता ऐसे नंबर
एसपी क्राइम एके पांडेय और सीओ क्राइम मनीष मिश्र के अनुसार रविवार सुबह सूचना पर क्राइम ब्रांच ने के ब्लॉक शास्त्रीनगर निवासी शशांक शर्मा पुत्र देवेंद्र शर्मा और ईदगाह, बागपत गेट निवासी आसिफ पुत्र इकबाल पठान को गिरफ्तार किया।
उनसे पूछताछ में सामने आया कि ये आरोपी काफी समय से महंगे देसी, विदेशी मोबाइल फोन का आईएमईआई बदलने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा विदेशों से आने वाले मोबाइल फोनों के लॉक ब्रेक भी करते हैं।
आरोपियों ने बताया कि मोबाइल चोरी करने वाले गैंगों से उनके संबंध हैं। ये उन चोरी हुए मोबाइल फोन के आईएमईआई नंबर बदल देते थे, ताकि वह सर्विलांस से पकड़ में न आ पाएं। बाद में बदले आईएमईआई नंबर के मोबाइल फोन सस्ते दामों पर बेच देते हैं।
मोबाइल से गोपनीय डाटा चुराकर बेचते भी हैं
एसपी के अनुसार आरोपियों के संपर्क चाईना, यूक्रेन और मलेशिया के हैकरों से भी हैं, जिनकी मदद से ये विदेशों में ही या भारत आने वाले विदेशी मोबाइल फोनों के लॉक ब्रेक करने का खेल करते थे। इस काम में शहर के कुछ मोबाइल सेंटरों के नाम भी सामने आए हैं जिनकी छानबीन की जा रही है।
इस गैंग ने आईसीएआरअनलॉक.कॉम नाम से वेबसाइट भी बना रखी थी। इसकी मदद से देसी विदेशी मोबाइल फोनों के लॉक ब्रेक करते थे। इसके लिए ये पहले उसके कंट्री कोड को हैक करते थे और फिर उसे क्रेक कर उसे डिकोड करते थे। इसके बाद ये संबंधित मोबाइल फोन से गोपनीय डाटा चुराकर उस मोबाइल फोन का दुरुपयोग करते थे।
आरोपियों से मिले लैपटॉप में ऐसे डाटा हैं, जो सनसनीखेज होने के साथ ही देशहित में नहीं हैं। इनकी जांच के लिए फोरेंसिक साइंस लैब आगरा और सीबीआई की साइबर लैब से संपर्क किया जा रहा है। सीबीआई इन डाटा की जांच करेगी, जिससे इनके इंटरनेशनल कनेक्शन की तस्वीर साफ हो सकेगी।
एसपी ने बताया कि इस गैंग में कई टेक्निकल एक्सपर्ट हैं। ये आरोपी गफ्फार मार्केट दिल्ली से एक बॉक्स खरीदते हैं, जो एक तरह से हार्डवेयर का काम करता है।
सैमसंग मोबाइल की आईएमईआई बदलने के लिए एसपीटी बॉक्स, सोनी के लिए सेल बॉक्स, माइक्रोमैक्स, कार्बन, इंटेक्स, स्पाइस आदि के लिए ड्रैग एफएन बॉक्स, एलजी के लिए ऑक्टोपस बॉक्स, नोकिया के लिए यूएफसी बॉक्स का प्रयोग होता था।
प्रत्येक बॉक्स की कीमत करीब 20 हजार है। यह बॉक्स इंटरनेट से संबंधित मोबाइल कंपनी से कनेक्ट हो जाता है और यह गैंग आसानी से उस मोबाइल फोन की आईएमईआई बदल देता था।