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'धनंजय रोक सकता था जागृति की बर्बरता'

Thu, 21 Nov 2013 03:08 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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अदालत ने बसपा सांसद धनंजय सिंह के आपराधिक इतिहास और पीड़ितों के बयानों के आधार पर उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने उनके कई तर्कों को खारिज कर दिया।
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अदालत ने कहा कि नौकरानी राखी के शरीर पर काफी घाव थे। डॉक्टरों के अनुसार ये घाव ही मृत्यु का कारण बने। धनंजय चाहता तो मारपीट की घटना को रोक सकता था लेकिन उसने हमेशा पत्नी को नौकरों से मारपीट के लिए उकसाया।

जागृति और धनंजय सिंह की हैवानियत की पूरी कहानी

आरोपी धनंजय को नौकरों से मारपीट की पूरी जानकारी थी और वह स्वयं भी मारपीट करता था। नौकरों के बयानों से स्पष्ट है कि जब पीड़ित उसे जागृति के मारपीट संबंधी व्यवहार के बारे में जानकारी देते थे तो वह कहता था कि वे इसी के हकदार हैं। उसने खुद भी मीना को चप्पल से मारा था।
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'पेशाब पीने को किया जाता था मजबूर'

सांसद के पत्नी से अलग रहने के तर्क पर अदालत ने कहा कि आरोपी ने स्वयं माना है कि वह उस मकान में आता रहता था, जहां जागृति रहती थी। अत: यह नहीं माना जा सकता कि वह अलग रहता था।

जौनपुर में होने का तर्क
अदालत ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि आरोपी घटना के समय दिल्ली में नहीं था लेकिन उसे जब पता चला तो उसने तुरंत पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी।

'बंधक बनाकर रखा'
अदालत ने कहा कि नौकर उसके कर्मचारी थे लेकिन उसने उन्हें बंधक बनाकर रखा। वह यह नहीं कह सकता कि जागृति ने बंधक बनाया। घर व नौकर उसके नियंत्रण में थे। ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि उसकी मर्जी के बिना यह हो रहा था।

'असहाय नौकरों कोघर में क्यों छोड़ा'
अदालत ने धनंजय के उस तर्क को भी खारिज कर दिया कि वह स्वयं पत्नी से पीड़ित है। अदालत ने कहा कि जब उसकी पत्नी का हिंसा का इतिहास रहा है तो उसने असहाय नौकरों को क्यों उस घर में छोड़ा।

आपराधिक इतिहास
धनंजय हत्या, हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट, दंगा, गैंगस्टर एक्ट इत्यादि आरोप में 31 आपराधिक मामलों में लिप्त रहा है। उसके पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए वह अदालत से सहानुभूति पाने का हकदार नहीं है।

जमानत अर्जी खारिज
अदालत ने धनंजय सिंह को जमानत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने धनंजय के खिलाफ दर्ज 31 आपराधिक मामलों, नौकरों की पिटाई, उनको बंधक बनाकर रखने, पत्नी को उकसाने आदि तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि सभी आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।

अदालत ने पुलिस को मामले में गवाहों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने धनंजय व जागृति को तीन दिसंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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