एक विकलांग युवती ने अपने किराएदार पर पांच महीने तक रेप करने का आरोप लगाया। मामला जब कोर्ट पहुंचा तो न्यायाधीश ने कहा कि सभी तथ्यों से स्पष्ट है कि युवती ने आरोपी से अपनी इच्छा से शरीरिक संबंध बनाए थे।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश टीआर नवल ने अपने फैसले में कहा कि 20 वर्षीय पीड़िता के बयान विरोधाभासी, अविश्वनीय व सच्चाई से परे है। युवती के युवक को लिखे पत्रों से स्पष्ट है कि वह उससे प्यार करती थी और उसने युवक से अपनी इच्छा से शरीरिक संबंध बनाए थे।
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अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का अपराध साबित करने में असफल रहा है। ऐसे में आरोपी को रेप व जान से मारने के आरोप में सजा नहीं दी जा सकती। अत: वे उसे इन आरोपों से बरी करते हैं। मामला दिल्ली का है।
'पांच माह किया रेप'
अभियोजन पक्ष के अनुसार, युवती ने शिकायत में कहा था कि वह पोलियों से पीड़ित है। अक्टूबर 2008 में उनके घर किराए पर रहने वाले युवक ने उससे रेप किया। जब उसके अभिभावक सुबह काम पर चले जाते थे तब आरोपी उसे धमकाकर पांच माह रेप करता रहा।
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भाई की हत्या की धमकी
युवती ने कहा कि आरोपी ने धमकी दी थी कि यदि उसने किसी को घटना के बारे में बताया तो वह उसके भाई की हत्या कर देगा। युवती ने गर्भवती होने के बाद गर्भपात करवाया और उसके बाद थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी।
'फर्जी मामले में फंसाया'
आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा कि युवती के परिवार के सदस्य विवाह के लिए दवाब बना रहे थे और उसके मना करने पर फर्जी मामले में फंसा दिया।