एसटीएफ जवानों के शहीद स्मारक को मटियामेट करने के दौरान बलखड़िया गिरोह के सदस्य चिल्ला कर कह रहे थे कि उनके इलाके में पुलिस जवानों का नहीं, बल्कि पुलिस के हाथों मारे गए दस्युओं का स्मारक बनेगा, वरना अभी पुलिस का स्मारक ढाया है और आगे थाना ढहा देंगे।
यूपी-एमपी पुलिस की नाक में दम कर चुके साढ़े छह लाख के इनामी दस्यु सरगना बलखड़िया ने फतेहगंज थाना क्षेत्र के बघोलन गांव तिराहे पर बनाए गए एसटीएफ के शहीदों का स्मारक शनिवार को जेसीबी मशीन से ध्वस्त कर दिया था।
इस दौरान वहां से गुजरने वाले और आसपास रहने वाले ग्रामीण डकैतों के हाथों जमकर पिटने के बाद सहमे हुए हैं। वह कुछ भी बताने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
काफी कुरेदने पर दबी जुबान में कुछ ग्रामीणों ने बताया कि डकैत कह रहे थे कि प्रशासन या पुलिस को स्मारक बनाना है तो उनका भी यहां स्मारक बनाएं, जिन्हें पुलिस डकैत बताकर मार चुकी है। ऐसा नहीं हुआ तो और भी बड़ी वारदात अंजाम दी जाएगी।
ग्रामीणों ने बताया कि गिरोह में करीब आधा दर्जन डकैत काले कपड़े पहने थे। कुछ ने शराब पी रखी थी। उन लोगों ने जेसीबी मशीन चालक कौशल कुशवाहा और उसके भाई अजय कुशवाहा को लाठियों से पीटकर दोनों के हाथ की हड्डियां तोड़ दीं। फिर उसी हालत में जेसीबी मशीन चलवाकर शहीद स्मारक तहस-नहस करवाया।
एक डकैत चालक की सीट के बगल में लगातार बैठा रहा। बघोलन पहाड़ी पर बैठा सरगना निर्देश देता रहा। जेसीबी मशीन मालिक चुन्नू पटेल को भी नहीं बख्शा। उसे भी मारपीट कर घायल कर दिया।
ध्वस्त स्मारक का रातों-रात निर्माण शुरू
शहीद स्मारक दिनदहाड़े ढहाए जाने से शर्मसार पुलिस ने रातों-रात स्मारक का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया। शनिवार देर शाम घटनास्थल पहुंचे पुलिस अधीक्षक सहित कई पुलिस अधिकारियों और भारी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में आनन-फानन सामग्री और मजदूर जुटाकर स्मारक पुनर्निर्माण शुरू करा दिया गया।
डकैतों से डरे आसपास के मजदूरों ने काम करने से इनकार कर दिया। पुलिस को अतर्रा, बदौसा आदि क्षेत्रों से मजदूर और अतर्रा नगर पालिका की जेसीबी व कर्मचारी निर्माण में लगाने पड़े।
एसपी उदयशंकर जायसवाल, सीओ अतर्रा केसी सिंह की उपस्थिति में बदौसा और फतेहगंज थानाध्यक्षों समेत एसटीएफ और पुलिस की मौजूदगी में आधी रात को सबसे पहले खोदी गई सड़क को समतल करके रास्ता बनाया गया। फिर स्मारक निर्माण शुरू हुआ।