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पेड़ पर लटकता शव देखकर कांप उठी लोगों की रूह

Fri, 06 Jun 2014 03:06 PM IST
पंकज मिश्र /अमर उजाला, देवरिया
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रविवार को घर आने के बाद मंगलवार को वह ममता को लेकर ससुराल के लिए चल दिया। शाम करीब 3.30 बजे नागेंद्र पत्नी ममता के ननिहाल पहुंचा। फिर कुछ देर रुकने के बाद वह ममता को लेकर ससुराल आ गया।
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नागेंद्र की सास केवला देवी कहती हैं कि मंगलवार की रात रुकने के बाद वह बुधवार को सुबह करीब दस बजे रेल टिकट बुक कराने की बात कहकर घर से निकले। उसके बाद आज उनके मौत की खबर मिली है।

नागेंद्र के परिवार वाले कहते हैं कि ममता के पिता का साया सिर से उठ जाने के चलते ममता तरकुलवा के मुंडेरा गांव अपने ननिहाल में ज्यादा रहती थी। वहीं मुंडेरा गांव के बगल के गांव सिधावे में नागेंद्र की ननिहाल थी।
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ऑनर किलिंग और आत्महत्या में सवाल

वह भी अक्सर ननिहाल आया जाया करता था। बताते हैं कि ममता और नागेंद्र दोनों का परिचय होने के बाद एक दूजे को पसंद करने लगे। दोनों परिवारों की रजामंदी के बाद ममता के मामा राजाराम ने शादी पक्की करने में अहम भूमिका निभाई।

नवविवाहिता के मामा राजाराम कहते हैं कि शादी कराना गुनाह है। उन्होंने तो अच्छा समझ कर शादी कराई थी। काश उन्हें यह दिन न देखना पड़ता। वह कहते हैं कि मंगलवार को शाम को महज दस मिनट के लिए दोनों आए थे और नागेंद्र सास से मिलने की बात कहकर ममता को लेकर चला गया।

वहीं लोगों का कहना था कि न जाने इस जोड़े पर किसी की नजर लग गई। तरकुलवा के पिपरा गांव में रस्सी से इन दोनों का लटकता शव देखकर लोगों का रूह कांप उठी।

क्या है नागेंद्र और ममता की मौत के मायने

जिंदगी के नए सफर की शुरूआत करने वाले नवदंपति को शायद यह न पता था जीवन की डोर इतनी जल्द थम जाएगी। अपने छांव से हर किसी को सकून देने वाले पाकड़ के पेड़ के नीचे खड़े गांववाले भी इस हृदय विदारक घटना से बेचैन हो उठे थे।

हम बात कर रहे हैं देवरिया जिले में पेड़ पर झूलते मिले नवदंपति की। पहली नजर में इसे ऑनर किलिंग का मामला माना गया लेकिन दोनों परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति के हवाले से पुलिस ने ऑनर किलिंग की गुंजाइश से इन्कार किया है।

हर कोई मौत के मायने तलाश रहा था। लोगों के जेहन में सवालों के तूफान उठ रहे थे। जिसका जवाब फिलहाल किसी के पास न था। 35 दिन पूर्व जिंदगी की नई पारी शुरू करने वाले नागेंद्र और ममता के जीवन को खुशियों को किसकी नजर लग गई, यह किसी के समझ में नहीं आ रहा था।
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35 दिन बाद छूट गया जिंदगी का ये सफर

रामपुर कारखाना के सिधुआ गांव निवासी राधे धोबी के तीन बेटों में नागेंद्र मझला बेटा था। 35 दिन पूर्व एक मई को तरकुलवा के फरेंदहा निवासी स्व. रामायण की बेटी ममता के साथ हुआ।

शादी के बाद ममता ससुराल आ गई। उसके बाद नागेंद्र अपने बड़े भाई शेषनाथ के पास कमाने बंगलुरू चला गया। अभी काम करते हुए उसे कुछ दिन ही बीते थे कि उसे रविवार को घर आना पड़ा।

नागेंद्र के पिता राधे और उसकी मां मालती देवी कहती हैं कि घर जाने के लिए नागेंद्र ने अपने बड़े भाई शेषनाथ से बात की तो उसने जाने से मना किया। नागेंद्र के पास किराया भाड़ा नहीं था। उसने अपने चुपके से अपना मोबाइल 2100 रुपये में बेचकर चुपके से घर के लिए चल दिया।
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