राजस्थान में जैसलमेर जिले के एसपी पंकज चौधरी ने कांगेस के वरिष्ठ नेता गाजी फकीर के अपराधों की पुरानी फाइल दोबारा क्या खोली, 48 घंटे में उनके तबादले का ऑर्डर आ गया।
ग्रेटर नोएडा की एसडीएम दुर्गाशक्ति नागपाल के निलंबन पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाली सोनिया गांधी राजस्थान सरकार के इस फैसले से सपा के निशाने पर आ गईं।
उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार की निंदा करने वाले कांग्रेसी राजस्थान में अपने नेता की दोबारा हिस्ट्रीशीट खोलने से नाराज हो गए। आखिर कौन है ये गाजी फकीर, और उसका क्षेत्र में क्या है रसूख इस पर एक रिपोर्ट।
84 साल के गाजी फकीर जैसलमेर जिले के भागु गांव के रहने वाले हैं। उनका एक बेटा सालेह मोहम्मद पोखरण से कांग्रेस का विधायक है जबकि दूसरा बेटा अबदुल्ला फकीर जैसलमेर का जिला प्रमुख है।
गाजी फकीर के परिवार का जैसलमेर और बाड़मेर जिले की राजनीति पर दबदबा है। वहां के सिंधी मुसलमान गाजी फकीर को धर्म गुरु के तौर पर मान्यता दे रखी है। कहा जाता है कि उनको मानने वाले उनके हर आदेश का पालन करते हैं।
इस क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी का मतलब ही गाजी फकीर है। उनके परिवार के आधे दर्जन से अधिक लोग जिला परिषद और पंचायत समितियों के सदस्य हैं।
गाजी फकीर पर तस्करी और देशद्रोह का मामला दर्ज है। वह एक हिस्ट्रीशीटर अपराधी है। उस पर भारत-पाकिस्तान सीमा पर तस्करी और गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त होने के आरोप हैं।
जुलाई 1965 में सबसे पहले उसके अपराधों की फाइल खोली गई थी, लेकिन 1984 में उसकी हिस्ट्रीशीट ही गायब कर दी गई।
फिर जिस अधिकारी ने उसके गुनाहों की पड़ताल करने की कोशिश की उसका तबादला कर दिया गया। 31 जुलाई 1990 में एसपी सुधीर प्रताप सिंह ने उसकी हिस्ट्रीशीट दोबारा खोली। लेकिन उसके 28 दिन बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया।
उनके तबादले के 21 साल बाद 12 मई 2011 में कार्यवाहक एसपी गणपत लाल ने उसकी फाइल बंद कर दी। हालांकि नियमों के तहत एसपी ही हिस्ट्रीशीट बंद कर सकता है। फाइल बंद करने पर तत्कालीन अपराध सहायक ने इसका विरोध किया था।