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मेरठ: दिनदहाड़े हत्या से बवाल, सांप्रदायिक तनाव

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मेरठ के मवाना में बहसूमा बाईपास पर रविवार दोपहर निलोहा गांव के किसान की गोलियां बरसाकर हत्या कर दी गई। हमले में उसका भतीजा गंभीर रूप से घायल हो गया। इस घटना से इलाके में सांप्रदायिक तनाव फैल गया।
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भीड़ ने शव को मवाना खुर्द पुलिस चौकी के सामने रखकर करीब साढ़े चार घंटे जाम लगाए रखा। मामले में मवाना थाने पर पांच नामजद सहित छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

देररात पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कवाल कांड के दौरान निलोहा गांव में हुई दूसरे समुदाय के व्यक्ति की हत्या का बदला लेने के लिए वारदात को अंजाम दिया गया।
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27 अगस्त 2013 को मुजफ्फरनगर के कवाल कांड के बाद आसपास का इलाका भी सांप्रदायिक तनाव की चपेट में आ गया था। कवाल कांड के अगले ही दिन मवाना थाना क्षेत्र के निलोहा गांव में नमाज पढ़कर निकल रहे लोगों पर लाठी-डंडों और असलहों से हमला बोल दिया गया था। हमले में निलोहा गांव निवासी मुंशी मलिक पुत्र चंदा खां की मौत हो गई थी।

ऐसे दिया घटना को अंजाम

पुलिस ने इस मामले में गांव निलोहा निवासी अश्वनी पुत्र नरेंद्र और सोनू पुत्र तेजपाल सिंह को जेल भेजा था। रविवार को नरेंद्र और उसके भतीजे सोनू का भाई मोनू जिला कारागार में उनसे मुलाकात कर बाइक से गांव लौट रहे थे।

दोपहर करीब दो बजे दोनों बहसूमा बाईपास से गांव जाने वाले कच्चे रास्ते की ओर मुडे़ तो दो बाइकों पर सवार आधा दर्जन लोगों ने बाइक सवार नरेंद्र (55) और मोनू को घेरकर गोलियां बरसा दीं। गोली लगने से नरेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई जबकि जांघ में गोली लगने से घायल मोनू को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सूचना पर पहुंचे सैकड़ों ग्रामीणों ने नरेंद्र का शव पुलिस चौकी के सामने रखकर जाम लगा दिया। 10 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा, हत्यारों की तीन दिनों में गिरफ्तारी और मृतक के पुत्र को पैरोल पर अंतिम संस्कार में भाग लेने की अनुमति का आश्वासन मिलने पर शाम करीब साढ़े छह बजे जाम खोला गया।

मामले में मोनू की तहरीर पर दीन मोहम्मद उर्फ दीनू पुत्र मुंशी, आशू पुत्र मुंशी, अनीस पुत्र सलीम, हुमायूं पुत्र बन्ने, इरफान पुत्र भूसे सभी निवासी निलोहा और इनके जाकिर कॉलोनी मेरठ निवासी एक रिश्तेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। इनमें से दो आरोपियों हुमायूं और अनीस को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

एसएसपी ओंकार सिंह ने बताया कि मवाना सहित पूरे जिले में सतर्कता बरती जा रही है। लोगों से अपील है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग दें। दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अन्य आरोपियों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

सुनियोजित था हमला, चाकुओं से भी गोदा

एसएसपी के मुताबिक, वारदात एक साल पहले से हुई मुंशी की हत्या से जोड़कर देखी जा रही है। इस हत्याकांड में नरेंद्र का पुत्र अश्वनी जेल में है। नरेंद्र की हत्या के बाद मुंशी के पुत्रों और अन्य को नामजद किया गया है।

किसान नरेंद्र और मोनू पर हमला सुनियोजित था। मोनू ने अस्पताल में बताया कि हमलावर उनकी ताक में खड़े थे। जैसे ही वह बहसूमा बाईपास से गांव की तरफ मुड़े तो उन पर गोलियां बरसा दी गईं। गोलियां लगने से नरेंद्र वहीं गिर पड़े जबकि वह जांघ में गोली लगने पर खेतों में कूदकर छुप गया था।

हमलावरों ने नरेंद्र को गोली मारने के बाद चाकुओं से भी गोदा था। अस्पताल में मोनू और ग्रामीणों ने बताया कि हमलावरों ने नरेंद्र को निशाना बनाकर गोलियां चलाई थीं। नरेंद्र को दो गोलियां मारी गईं और फिर तसल्ली करने के लिए नरेंद्र पर चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए।

उस समय उसे भी जांघ में गोली लगी तो वह जान बचाने के लिए ईख के खेत में जाकर घुस गया। ग्रामीणों का भी कहना था कि जिस समय वे लोग मौके पर पहुंचे तो मोनू घायल अवस्था में गन्ने के खेत के अंदर था। उनके आने के बाद जब मोनू को लगा कि अब सुरक्षित है तो उसके बाद ही खेत से बाहर आया और घटना की जानकारी दी। पुलिस ने मौके से दो खोखा कारतूस बरामद किए हैं।

जेल से आएगा बेटा तभी होगा अंतिम संस्कार

पुलिस चौकी के सामने जाम लगाने के दौरान परिजनों और ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि नरेंद्र का पुत्र अश्वनी जेल से पैरोल पर अंतिम संस्कार के लिए नहीं आता है तो नरेंद्र का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।

पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के समझाने पर ग्रामीणों ने इसी आश्वासन पर जाम खोला कि नरेंद्र के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए जेल में बंद उसके पुत्र अश्वनी को पैरोल पर छोड़ा जाएगा। भीड़ ने साफ शब्दों में कह दिया है कि यदि अश्वनी नहीं आया तो नरेंद्र का अंतिम संस्कार नहीं होगा तथा हम फिर से जाम लगाने को मजबूर होंगे।

भीड़ के उग्र तेवर जहां नेता जाम खुलवाने का साहस नहीं जुटा पाए, वहीं अधिकारियों के भी पसीने छूट गए। प्रयास के बावजूद जब लगा कि बात नहीं बनने वाली है तो वे भी आराम से बैठ गए। नरेंद्र की हत्या के आक्रोश में जाम लगा रही भीड़ के तेवर काफी उग्र थे।

उनका कहना था कि यदि दूसरे समुदाय के साथ कुछ हो जाता है तो पूरा प्रशासन जुट जाता है। आज प्रशासन जाम खुलवाने के लिए तो प्रयासरत है लेकिन हत्यारों को गिरफ्तार करने के लिए नहीं।
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नरेंद्र को मिल रही थी धमकी

बवाल की सूचना पर रालोद के रतन सिंह, हरबीर सिंह, भाजपा उपाध्यक्ष दिनेश खटीक, पूर्व विधायक अतुल खटीक, पूर्व विधायक गोपाल काली, जिला पंचायत अध्यक्ष मनिंदर पाल सिंह आदि नेता मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से वार्ता कर भीड़ को शांत कर जाम खुलवाने का प्रयास किया लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। इसका बड़ा कारण जनता और अफसरों के बीच विश्वास की कमी और संवादहीनता भी रही।

पूर्व विधायक अतुल खटीक ने एसएसपी से कहा कि परिवार के लोगों का आरोप है कि नरेंद्र को पहले से धमकी मिल रही थी। नरेंद्र की रिश्तेदारी में पौत्र राहुल का भी आरोप था कि शुक्रवार रात आरोपी मुंशी के परिवार के लोगों ने जान से मारने की धमकी दी थी।

इस पर एसएसपी का जवाब था कि यदि ऐसा था तो कहीं शिकायत क्यों नहीं की गई। पहले इस प्रकार की कोई बात स्थानीय और न ही जिले के किसी अधिकारी को बताई गई थी।
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