अपने तीन बच्चों को निर्दयता पूर्वक मौत के घाट उतारने वाली महिला की मौत हो गई है। 49 वर्षीय थेरेसा रिग्गी ने अगस्त 2010 में अपने तीन बच्चों को मार डाला था।
थेरेसा ने अपने तीनों बच्चों के पेट में 13 बार चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया था। तीनों बच्चों को मारने के लिए उसने अलग-अलग चाकू का इस्तेमाल किया था।
थेरेसा को 2011 में इसके लिए कोर्ट ने 16 साल जेल की सजा सुनाई थी। जेल में हुई मौत के बाद पुलिस को शुरूआती जांच में यह मामला आत्महत्या का लगता है।
चाकू मारकर घर में लगा दी थी आग
थेरेसा का अपने पति के साथ तलाक को लेकर झगड़ा चल रहा था। इस लिए वह काफी परेशान रहती थी। एक दिन वह आपा खो बैठी।
थेरेसा ने अपने बेटे ऑस्टिन और गियानलुका के पेट में आठ बार और तीसरे बेटे सेसेला को पांच बार चाकू मारकर मौत के घाट उतार दिया था।
अपने अपराध को छिपाने के लिए थेरेसा ने घर में गैस के सिलेंडर में आग लगा दी थी ताकि पुलिस को लगे कि बच्चों की मौत जलने से हुई है। आग लगाने के बाद वह ख्रुद 40 फीट ऊंची बालकनी से कूद गई थी।
इसके लिए वह काफी दिन तक अस्पताल में भर्ती रही थी। इसी दौरान उनके डिस्ऑर्डर का भी पता चला था। शुरूआत में उसे कार्टन वेल जेल में रखा गया था। बाद में बीमारी का पता चलने के बाद उसे स्पेशल सेल में शिफ्ट किया गया था।
तीनों बच्चों का अलग-अलग चाकू से किया था कत्ल
थेरेसा ने तीनों बच्चों को मारने के लिए उसने अलग-अलग चाकू का इस्तेमाल किया था। डॉक्टरों ने बताया था कि थेरेसा को नैरसिस्टिक, पैरानॉयड और हिस्ट्रीयॉनिक डिस्ऑर्डर है।
नैरसिस्टिक एक ग्रीक टर्म है। यह एक तरह का पर्सनैलिटी डिस्ऑर्डर है। इसके तहत इंसान को सिर्फ खुद से ही प्यार होता है। वह एक तरह से इगो नेचर हो जाता है।
पैरानॉयड एक तरह का मेंटल डिस्ऑर्डर है। इस बीमारी में आप किसी दूसरे पर बिलकुल भी भरोसा नहीं करते। हिस्ट्रीयॉनिक डिस्ऑर्डर से पीड़ित इंसान बात-बात पर भावुक हो जाता है।
अमेरिकन साइकैट्रिस्ट एसोसिएशन के मुताबिक अमेरिका में ज्यादातर महिलाओं को यह बीमारी है। थेरेसा के पति पैसक्वेल रिग्गी ने कहा कि मुझे जिंदगी भर इस बात का अफसोस रहेगा कि मैं अपने बच्चों को नहीं बचा सका।