अपनी प्रेमिकाओं के चक्कर में फंसकर अजीत उर्फ बंटी पुलिस के हाथ अखिरकार लग ही गया। हाल ही में एसटीएफ के हत्थे चढ़े लखनऊ के चर्चित माज हत्याकांड के मुख्य आरोपी अजीत यादव उर्फ बंटी को वाराणसी पुलिस रिमांड पर लेने की तैयारी में है।
उससे सारनाथ से लूटी गई कार के मामले में पूछताछ की जानी है। इस घटना में एक युवती की भूमिका पाई गई है। यह युवती बंटी की प्रेमिका बताई गई है। वाराणसी, मऊ और गोरखपुर की कुछ और युवतियों से भी बंटी के प्रेम संबंधों का पता चला है।
सर्विलांस पर लगाए गए इन युवतियों के मोबाइल नंबरों ने ही बंटी तक पहुंचने की एसटीएफ की राह आसान की थी। अजीत उर्फ बंटी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने में एक बार जिस सिम का उपयोग कर लेता था, उसे तोड़कर फेंक देता था।
लेकिन उसकी गिरफ्तारी के समय जो कार बरामद हुई उसके बारे में छानबीन की गई तो पता चला कि यह पिछले छह अप्रैल को सारनाथ से जहरखुरानीकर लूटी गई थी।
अचेत चालक राजकुमार राजभर को आजमगढ़ में फेंक दिया गया था। कार बुक करने के लिए चालक को जिस मोबाइल नंबर से कॉल की गई थी, उसकी डिटेल निकलवाई गई तो पता चला कि कार चालक के अलावा उस सिम से सिर्फ एक कॉल की गई थी।
सर्विलांस पर मिली कई अहम जानकारियां
बताया गया कि यह नबंर उसकी एक प्रेमिका का था। इस नंबर को सर्विलांस पर लगाने के बाद पुलिस को कई अहम जानकारियां मिलने लगीं। इससे एसटीएफ को कार लूट में बंटी के शामिल होने का पता चला। साथ ही, उसकी कुछ और प्रेमिकाओं के मोबाइल नंबर हाथ लग गए।
फिर उसकी लोकेशन ट्रेस होती गई और 17 सितंबर को गाजीपुर के मरदह में मुठभेड़ के बाद एसटीएफ ने उसे धर-दबोचा। गाजीपुर निवासी बंटी को 29 अप्रैल 2013 को लखनऊ के इंदिरा नगर क्षेत्र में हुए माज हत्याकांड के बाद गिरफ्तार किया गया था, लेकिन 23 जनवरी 2014 को ट्रेन से पेशी पर बलिया लाए जाते समय वह पुलिस कस्टडी से फरार हो गया था।
उसने वाराणसी, मऊ, गाजीपुर के अलावा गोरखपुर में ठिकाना बनाया। व्यापारियों और डॉक्टरों से रंगदारी वसूलने में जुट गया। फरारी के दौरान वाराणसी, मऊ की एक-एक और गोरखपुर की दो युवतियां उसके संपर्क में आईं। इनसे उसने प्रेम का नाटक रचा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अपनी प्रेमिकाओं से संपर्क में रहने के लिए उसने पांच मोबाइल और 12 सिमकार्ड रखे थे।