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सुपारी देकर कराई गई भाजपा नेता की हत्या

Thu, 12 Jun 2014 01:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर में मौका ए वारदात पर मिले एक अहम सुराग ने भाजपा नेता हत्याकांड की परतें खोलकर रख दीं। वारदात को अंजाम देने वाला मोनू गुर्जर पुलिस को मोदीपुरम के एक हॉस्पिटल से इलाज कराता मिला है। पुलिस की अभी तक की तफ्तीश में काफी कुछ साफ हो चुका है। हत्या सुपारी देकर कराई गई। वारदात का मोटिव लाखों के लेनदेन का है।
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वारदात के दौरान पूरे घटनाक्रम को खेत में काम करने वाले एक किसान ने देखा था। पुलिस ने उससे लंबी पूछताछ की। उसने बदमाशों के हुलिए बताकर पुलिस का काम आसान कर दिया। पुलिस रात से ही मोनू की खोजबीन में जुटी थी। इसी दौरान एक मुखबिर की कॉल ने पुलिस को बड़ी कामयाबी दिला दी।

मोनू को मोदीपुरम के कोटपाल हॉस्पिटल से पकड़ लिया गया। एसपी क्राइम राकेश जौली के मुताबिक मोनू को भर्ती कराने वाले झोलाछाप डॉक्टर रामकुमार को भी उठा लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है। रामकुमार मृतक भाजपा नेता का भी रिश्तेदार है।
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पुलिस की तफ्तीश में यह आया सामने

पुलिस की तफ्तीश में अभी तक जो सामने आया है, उसके मुताबिक भाजपा नेता ओमवीर के मामा अमीरा पुत्र बलवंत हस्तिनापुर थाने के हुमायूंपुर गांव के रहने वाले थे। उनका कोई बेटा नहीं था। सिर्फ तीन बेटियां हैं, जिनमें दो दरियाबाद और एक घोरिया गांव में ब्याही हैं। अमीरा की दो साल पहले मौत हो चुकी है।

अमीरा ने मरने से पहले जमीन बेचकर कुछ रुपया बेटियों में बांट दिया था, जबकि ज्यादातर पैसा ओमवीर को अपनी देखरेख और अंतिम समय में मदद करने के लिए दिया था। पुलिस के मुताबिक ओमवीर ने यह पैसा अमीरा के मरने के बाद बेटियों को नहीं लौटाया।

इस मामले को लेकर अमीरा के दामादों ने कई बार पंचायतें भी कीं। पुलिस मान रही है कि इन्हीं रिश्तेदारों में से किसी ने मोनू गुर्जर को सुपारी देकर ओमवीर की हत्या कराई है। एसपी क्राइम के मुताबिक दरियाबाद और घोरिया में दबिश दी गई है। दो दामाद फरार मिले हैं।
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कौन है मोनू गुर्जर

हस्तिनापुर के अलीपुर मोरना गांव का मोनू गुर्जर उस समय चर्चाओं में आया था, जब उसने 2009 में छात्राओं से छेड़छाड़ को लेकर मवाना में दो मुस्लिम युवकों की हत्या कर दी थी। हत्या के बाद मवाना में सांप्रदायिक बवाल हुआ और कर्फ्यू तक की नौबत आ गई।

मोनू के जेल में रहते हुए उसकी मां सुशीला नागर ने जिला पंचायत का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। जेल में रहने के दौरान ही मोनू के पिता धर्मसिंह का कत्ल हो गया। जिसमें उसके ही साथियों के नाम आए। फैसले को दबाव बनाने के लिए मोनू के साथ जेल में बंद साथी के परिजनों ने ही धर्मसिंह की हत्या कर दी।

चार साल बाद मोनू जेल से रिहा हुआ। इस दौरान उसने जेल से ही फर्स्ट डिवीजन से इंटर पास की। इलाके के कुछ लोगों ने डबल मर्डर में फैसला भी करा दिया। मोनू के दो और भाई हैं। एक भाई सोनू हाईवे लूटकांड में जेल में बंद है, जबकि दूसरा गांव में ही शिक्षामित्र की नौकरी करता है।
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