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बदायूं रेप और हत्याकांड में मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Thu, 28 Jan 2016 11:49 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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यूपी के बदायूं में बहुचर्चित कटरा सआदतगंज कांड के मुख्य आरोपी पप्पू यादव को सीबीआई ने मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। उसे स्पेशल जज (पाक्सो एक्ट) वीरेंद्र पांडेय की कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने पप्पू यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। स्पेशल जज ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट खारिज करते हुए पप्पू यादव को तलब किया था। स्पेशल जज ने हाजिर न होने पर उसके खिलाफ 18 जनवरी को गैर जमानती वारंट जारी कर उसे 28 जनवरी को कोर्ट में पेश करने के आदेश दिए थे। इससे एक दिन पहले ही सीबीआई ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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क्या है बदायूं रेप मामला?

बदायूं के कटरा सआदतगंज में 27/28 मई, 2014 की रात दो बहनों की लाशें पेड़ पर लटकी मिली थीं। लड़कियों के परिवार वालों ने पप्पू यादव, अवधेश यादव, उर्वेश यादव समेत कटरा सआदतगंज पुलिस चौकी के सिपाही सर्वेश यादव और छत्रपाल गंगवार के खिलाफ गैंगरेप के बाद हत्या का मामला दर्ज कराया था। घटना की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। तय समय में चार्जशीट दाखिल न होने पर कोर्ट ने पांचों आरोपियों को सितंबर, 2014 में जमानत पर रिहा कर दिया। सीबीआई ने 11 दिसंबर, 2014 को मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए सभी आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी।

स्पेशल जज (पाक्सो एक्ट) ने 28 अक्तूबर, 2015 को सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर पप्पू यादव को पाक्सो एक्ट का आरोपी मानते हुए समन जारी कर तलब किया। 28 नवंबर, 2015 को पप्पू को कोर्ट में पेश होना था लेकिन वह कोर्ट नहीं पहुंचा। कोर्ट ने 23 दिसंबर मुकर्रर की। इस दिन भी पप्पू यादव कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। इस पर 18 जनवरी को स्पेशल जज ने पप्पू यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया। सुनवाई के लिए 28 जनवरी मुकर्रर कर दी थी।
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मंगलवार को सीबीआई के सब इंस्पेक्टर संजय शर्मा के नेतृत्व में दो सदस्यीय टीम कटरा सआदतगंज पहुंची। पप्पू यादव को स्थानीय पुलिस की मदद से सीबीआई ने घर से ही गिरफ्तार कर लिया। जिला अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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तो क्या किरकिरी से बचने के लिए सीबीआई ने की कार्रवाई?

कटरा सआदतगंज कांड की क्लोजर रिपोर्ट खारिज होने से सीबीआई को झटका लगा था। कोर्ट ने पप्पू यादव को तलब किया तो सीबीआई की किरकिरी हुई। जांच पर अंगुलियां उठने लगीं। हालांकि जांच एजेंसी के अधिकारी दावा करते रहे कि क्लोजर रिपोर्ट सही है। सीबीआई के डीएसपी विजय शुक्ला का कहना था कि कोर्ट ने सिर्फ पप्पू यादव को पाक्सो एक्ट का आरोपी माना है। बाकी चार आरोपियों की भूमिका पर कोर्ट जांच एजेंसी से सहमत है।

पप्पू यादव को 28 नवंबर को कोर्ट में पेश होना था। सम्मन तामील न होने की वजह से वह कोर्ट नहीं आया। इसके बाद कोर्ट ने 23 दिसंबर निर्धारित कर दी। इस बार सम्मन भी तामील हो गए लेकिन पप्पू हाजिर नहीं हुआ। 18 जनवरी को पप्पू के वकील ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देकर पेशी में छूट मांगी। कोर्ट ने प्रार्थना पत्र खारिज कर पप्पू यादव के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिए।

जांच एजेंसी की भी फटकार लगाते हुए 28 जनवरी मुकर्रर कर दी। सीबीआई को शक था कि पप्पू यादव 28 जनवरी को भी कोर्ट में पेश नहीं होगा। अगर ऐसा होता तो जांच एजेंसी की काफी फजीहत होती। ऐसे में सीबीआई ने फजीहत से पहले के लिए पप्पू यादव को एक दिन पहले ही गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर दिया।

वादी पक्ष की ओर से स्पेशल जज पाक्सो एक्ट द्वारा पांच आरोपियों में सिर्फ पप्पू यादव को तलब किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मांग थी कि सभी आरोपियों को तलब किया जाए। इस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने बाकी कि सभी आरोपियों को भी तलब कर लिया था। इससे सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पर फिर से सवाल उठने लगे थे। हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए 15 फरवरी तय की है।

इस आदेश के बाद से सीबीआई दबाव में है। कानून के जानकारों की मानें तो स्पेशल जज पाक्सो एक्ट और हाईकोर्ट के सख्त रुख के चलते ही सीबीआई ने पप्पू यादव को गिरफ्तार किया है।
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