इस टेस्ट के माध्यम से व्यक्ति को एक मशीन के संपर्क में लाया जाता है।
ताबड़तोड़ सवालों के बीच मशीन के जरिये व्यक्ति की नाड़ी की गति और हृदय की उच्चतम गति को मापा जाता है।
संयंत्र के जरिये व्यक्ति के शरीर की सहमति, असहमति, क्रिया कलाप, संवेदना और तनाव का परीक्षण किया जाता है।
व्यक्ति के बयानों की गुणवत्ता और साक्ष्य की परख भी विशेषज्ञ आसानी से कर लेते हैं। टेस्ट के बीच में ही अक्सर दोषी अपना अपराध स्वीकार लेता है तो निर्दोष होने पर उसके बयान की प्रमाणिकता बढ़ जाती है।
2. नार्को एनालाइसिस टेस्ट
जिस तरह एमआरआई और सीटी स्कैन शरीर की विभिन्न खामियों को उजागर करके भविष्य के इलाज में कारगर साबित होते हैं ठीक उसी तरह नार्को टेस्ट भी केस को आगे चलाने की दिशा देने या बंद करने में खासी प्रमाणिक जानकारी देता है। शरीर को कोई नुकसान न पहुंचाने वाले विशेष श्रेणी के निश्चेतक पदार्थ की मदद से आरोपी सच ही कबूलता है।
3. ब्रैन मैपिंग टेस्ट
इस टेस्ट को पी-300 परीक्षण भी कहा जाता है। इसमें संबंधित आरोपी के मस्तिष्क की तरंगों की छाप को संकलित किया जाता है। जब व्यक्ति कम्प्यूटर के मॉनीटर पर बैठता है तो कुछ परछाइयां और आवाजें इस तरह आती हैं कि सेंसर मॉनीटर की विद्युतीय विधि मस्तिष्क में पहुंचती है। यह स्थिति व्यक्ति को घटनास्थल से जोड़ती है और घटना के बारे में अधिकतम जानकारी वह बता देता है।
ऐसे होगा आरोपियों का नार्को, लाई डिटेक्टर, ब्रेन मेपिंग टेस्ट
बदायूं के उसहैत थाना क्षेत्र में दो बहनों की सामूहिक दुष्कर्म के बाद पेड़ से लटकाकर मार डालने की वारदात में विवेचना को बदायूं आई सीबीआई टीम को अभियुक्तों के नार्को, लाई डिटेक्टर और ब्रेन मेपिंग टेस्ट कराने की कोर्ट से मंजूरी मिल गई है।
सीबीआई पांचों अभियुक्तों का बदायूं या फिर कहीं भी ले जाकर नार्को टेस्ट, लाई डिटेक्टर टेस्ट और ब्रेन मेपिंग कराने को स्वतंत्र है।
दो बहनों के साथ दुराचार के बाद पेड़ से लटकाकर उनकी हत्या करने की घटना की गूंज देश भर में हुई थी। इस घटना के पांचों नामजद आरोपी जेल में बंद हैं। इनमें तीन सगे भाई पप्पू यादव, अवधेश और उर्वेश हैं तो दो बर्खास्त सिपाही सर्वेश यादव और छत्रपाल भी शामिल हैं।
इन टेस्टों के जरिए सच जानने की कोशिश करेगी सीबीआई
अदालत की स्वीकृति के बाद अब कटरा सआदतगंज कांड के पांचों आरोपियों को वैज्ञानिक विधियों पर आधारित अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा।
इससे काफी हद तक केस की तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके रिजल्ट से सीबीआई बताएगी इनमें से कौन दागी और कौन बेकसूर है। टेस्टों की प्रक्रिया के बारे में सीबीआई ने पॉक्सो कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है।
कोर्ट को विश्वास दिलाया गया कि इन टेस्टों से बिना किसी शारीरिक और मानसिक परेशानी के घटना का अन्वेषण किया जा सकता है। आप भी जानिए कि इन टेस्ट के बारे में।