कैंट-इंग्लिशिया लाइन मार्ग स्थित एक होटल में फांसी लगाने वाले चार्टर्ड एकाउंटेंट आशीष गुप्ता (37) की लाश मंगलवार को उसके घरवालों के पहुंचने पर फंदे से उतारी गई।
पोस्टमार्टम के बाद शाम को अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। आशीष के कमरे से सुसाइड नोट के अलावा करीब दस हजार रुपये नगद बरामद किए गए लेकिन उसका मोबाइल कमरे में नहीं मिला।
उसने होटल में पते के साथ जो मोबाइल नंबर दर्ज करवाया था वह गलत था। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। पुलिस का मानना है कि पारिवारिक विवाद की वजह से आशीष ने फांसी लगाई।
फंदे से उतारी गई सीए की लाश, मोबाइल गायब
मूलत: वाराणसी के चौक थाना क्षेत्र के बड़ादेव निवासी आशीष के पिता धर्मराज गुप्ता बिजली विभाग में लेखाधिकारी थे। बाद में वह लखनऊ के विकास नगर में बस गए। आशीष दिल्ली में चार्टर्ड अकाउंटेंट था।
पत्नी और एक बेटे के साथ वह दिल्ली में ही रहता था। पत्नी पूनम निजी कंपनी में नौकरी करती हैं। 11 जुलाई को आशीष वाराणसी पहुंचा था। वह कैंट-इंग्लिशिया लाइन मार्ग स्थित एक होटल के रूम नंबर 52 में रुका था।
होटल के रजिस्टर में उसने लखनऊ का पता दर्ज कराया था। 12 जुलाई की रात के बाद से वह कमरे से बाहर नहीं निकला। होटल प्रबंधन की सूचना पर 14 जुलाई को पुलिस की मौजूदगी में कुंडी तोड़कर उसके कमरे का दरवाजा खोला गया।
वह कमरे में नहीं था। बाथरूम अंदर से बंद था। बाथरूम का दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर उसका शव फंदे से लटका पड़ा था। उसने बाथरूम के रोशनदान से दुपट्टे (स्टोल) से फांसी लगाई थी।
एसी कमरे में सोये पिता, सुबह लिया नाश्ता
कमरे से एक पेज का सुसाइड नोट बरामद किया गया। इस पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा हुआ था। इसमें आशीष ने अपनी मौत का जिम्मेदार खुद को बताया था।
पुलिस की पूछताछ में आशीष के पिता धर्मराज ने बताया कि वह घूमने के लिए वाराणसी आया था। उसने ऐसा क्यों किया, इसका जवाब उनके पास भी नहीं था।
आशीष के पिता धर्मराज और मां लक्ष्मी सोमवार की देर रात ही वाराणसी पहुंच गए थे। जिस होटल में बेटे ने फांसी लगाई उसी होटल के एसी कमरे में वह रुके। होटलकर्मियों का कहना है कि वह बेटे की लाश को देखने तक नहीं गए।
पुलिस के पहुंचने पर देखा बेटे की लाश
मंगलवार की सुबह आर्डर देकर उन्होंने नाश्ता मंगवाया। पुलिस के पहुंचने के बाद वह बेटे के कमरे तक गए। उनकी मौजूदगी में शव को फंदे से नीचे उतारा गया। पता चला कि आशीष ने लव मैरिज की थी।
इसे लेकर पिता नाराज रहते थे। आशीष पिछले चार साल से लखनऊ स्थित अपने घर नहीं गया था। आशीष गुप्ता का परिवार मूल रूप से चौक थाना क्षेत्र के बड़ादेव का रहने वाला है।
उसके पिता लखनऊ में बस गए। चाचा का परिवार बड़ादेव में ही रहता है। आशीष ने अपने वाराणसी आने की सूचना चाचा को भी नहीं दी थी। सूचना के बाद चाचा का परिवार भी होटल पहुंचा था।