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800 साल पुराने मंदिर से चोरी हुईं एंटीक मूर्तियां

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कर्नाटक के नागेश्वर मंदिर से सरस्वती और दुर्गा की दुर्लभ मूर्तियां चोरी होने से पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं। पिछले महीने हुई चोरी के बाद अब विभाग ने राज्य की पुलिस और सीबीआई को पत्र लिखकर इसकी सूचना दी है।
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शुरूआती जांच में पता चला है कि वारदात को अंजाम देने से पहले चोरों ने मंदिर के आसपास की रेकी की थी। इसके बाद मौका देखते ही बहुमूल्य मूर्तियों को चुराकर फरार हो गए।

जेएनयू के प्रो. वाईएस एलोन ने बताया कि, दोनों मूर्तियां काफी भारी पत्थर और धातु की बनी थीं, जिन्हें चुराने के लिए कई आदमियों की जरूरत पड़ी होगी। अनुमान लगाया जा रहा है कि चोरों ने मूर्तियां ले जाने से पहले उन्होंने किसी धारदार हथियार से उन्हें अलग किया होगा।
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पुरातत्व विभाग के पत्र में इस बात का जिक्र किया गया है कि मंदिर में चोरी तब हुई जब सुरक्षा गार्ड किसी निजी काम से मंदिर छोड़कर चला गया था। अब तक इस बात का पता नहीं चल सका है कि करीब 800 साल पुराने इस मंदिर से मूर्तियां चोरी करने वाले कौन हैं।
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इस वजह से महत्वपूर्ण हैं ये मूर्तियां

डेली मेल के अनुसार,  विशेषज्ञों का मानना है कि यह काम किसी तस्कर गिरोह का है। प्रो. एलोन ने बताया कि इस इलाके में आसपास एंटीक वस्तुओं का बहुत बड़ा बाजार है। साथ ही यहां के बहुत से लोग ऐसे एंटीक सामान से स्मृति चिन्ह बनाने का काम भी करते हैं।

इंडिया हैबिटेट सेंटर की आर्ट डायरेक्‍टर अल्का पांडे ने बताया कि ये मूर्तियां शास्‍त्रों और अपनी बनावट की वजह से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि एक सुरक्षित जगह से ये दुर्लभ मूर्तियां चोरी हो गईं। अब इस बात की संभावना है कि तस्कर इन मूर्तियों को छिपा दें और कुछ साल बाद बेचें।

सूत्रों के अनुसार, कनार्टक की हस्सान जिला पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुरातत्व विभाग के पास करीब 3600 ऐसे स्मारक हैं जबकि करीब 3000 स्मारक राज्य सरकार की देखरेख में हैं। हालांकि ऐसे बहुत से स्मारक हैं जो पुरातत्व विभाग और राज्य सरकार दोनों की देखरेख में नहीं हैं।
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