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क्या वनडे में बदलेगी टीम इंडिया की तकदीर

Wed, 20 Aug 2014 08:39 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला
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मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-3 से शर्मनाक हार के बाद अब विश्व चैंपियन भारत के लिए आगामी 25 अगस्त से शुरू होने वाली पांच वनडे मैचों की सीरीज में सम्मान बचाने की बड़ी चुनौती है।

धोनी एंड कंपनी अब इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हो चुकी है कि आने वाले समय में उसके लिए चुनौतियां और ज्यादा बढ़ने वाली हैं। 2011 में इंग्लैंड दौरे पर भारत को पांच मैचों की वनडे सीरीज में 0-3 से करारी हार का सामना करना पड़ा था।
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सीरीज का एक मैच टाई रहा था जबकि एक मैच बारिश से धुल गया था। रिकॉर्ड भारत के पक्ष में नहीं हैं और हालिया टेस्ट सीरीज में शर्मनाक हार के दबाव से उबरना टीम इंडिया के लिए कड़ी परीक्षा के समान होगा।

हालांकि टेस्ट रिकॉर्ड के इतर कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कमान में भारतीय टीम का विदेश में प्रदर्शन अच्छा रहा है। धोनी की कप्तानी में भारत ने विदेशी जमीन पर 99 मैच खेले हैं जिसमें से 52 जीते हैं जबकि 37 हारे हैं। तीन मैच टाई रहे हैं जबकि सात मैच बेनतीजा रहे हैं।

बात अगर 2014 में भारतीय टीम के वनडे फॉरमेट में प्रदर्शन पर करें तो परिणाम काफी अच्छे नहीं हैं। 2014 में भारत ने अब तक 12 वनडे मैच खेले हैं जिसमें से उसने छह हारे हैं और सिर्फ चार जीते हैं। वहीं एक मैच टाई रहा और एक बेनतीजा रहा।

भारत ने इस साल जिन चार मैचों में जीत दर्ज की है उसमें धोनी एंड कंपनी ने एक मैच अफगानिस्तान के खिलाफ जबकि तीन मैच बांग्लादेश के खिलाफ जीते हैं। वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ उसे चार मैचों में जबकि पाकिस्तान जैसी मजबूत टीम के खिलाफ एक मैच में हार का सामना करना पड़ा है।

साफ है कि टेस्ट की तरह वनडे में भी टीम इंडिया इस साल प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर सकी है। इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में करन शर्मा और संजू सैमसन टीम के नए चेहरे हैं।

वहीं टेस्ट की तरह वनडे में भी टीम इंडिया की जीत का दारोमदार कप्तान धोनी, विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे, रोहित शर्मा, रविंद्र जडेजा और शिखर धवन जैसे दिग्गजों पर होगा। टेस्ट सीरीज में धोनी को छोड़कर अन्य सभी दिग्गजों ने बेहद निराश किया।
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ऐसे में अब इन सभी बल्लेबाजों को पिछली असफलता भूलकर आगे देखने की जरूरत है। सुरेश रैना के आने से मध्यक्रम मजबूत होगा लेकिन पिछले एक साल में बाएं हाथ के इस बल्लेबाज का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा है।

अब देखना है कि क्या विश्व चैंपियन वनडे में अपना सम्मान बचा पाते हैं या फिर नतीजा टेस्ट सीरीज की तरह शर्मनाक रहेगा।
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