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ऑस्ट्रेलिया से मिली हार ने उम्मीदें खत्म की

Thu, 04 Oct 2012 12:03 AM IST
कोलंबो/खेल डेस्क
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ट्वंटी-20 वर्ल्ड कप खिताब की होड़ से बाहर हो चुकी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने कहा कि सुपर-8 के पहले मैच में ऑस्ट्रेलिया से मिली बड़ी हार ने हमारी संभावनाओं पर बुरा प्रभाव डाला। हालांकि धोनी ने कहा कि वह टूर्नामेंट में टीम के प्रदर्शन से संतुष्ट हैं।
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धोनी ने कहा, ‘टीम का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। यदि हम टूर्नामेंट की बात करें तो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मिली हार ने टीम पर बुरा प्रभाव डाला। ऑस्ट्रेलिया से मिली हार का अंतर काफी बड़ा था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच से पहले हमारा समीकरण यह था कि हम पहले गेंदबाजी करें और उसके बाद जो भी लक्ष्य मिले उसे 15-16 ओवर में हासिल करें। लेकिन जब आप पहले बल्लेबाजी करते हैं तो ऐसे में कोई भी रणनीति बनाना बेहद कठिन हो जाता है। किसी भी हालात में 120 रन का बचाव करना भी बहुत कठिन काम था।’

इस बीच, सीनियर खिलाड़ियों को टीम से बाहर किए जाने के सवाल पर धोनी ने कहा, ‘जब भी हम अच्छा प्रदर्शन नहीं करते, मुझसे यह सवाल पूछा जाता है। जब हम ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में हारे तब भी यह सवाल पूछा गया था। लेकिन टूर्नामेंट में हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा और हम सिर्फ एक मैच हारे।’
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ओपनरों की नाकामी भारी पड़ी
सेमीफाइनल में न पहुंच पाने के लिए धोनी ने ओपनरों की नाकामी को एक बड़ा कारण माना। धोनी ने कहा, ‘हमारे शीर्ष क्रम के बल्लेबाज टूर्नामेंट में लगातार विफल रहे जिसके कारण टीम पूरे टूर्नामेंट में कभी बड़ा स्कोर नहीं बना पाई। हमारी टीम हमेशा अच्छी शुरुआत पर निर्भर रही है लेकिन इस टूर्नामेंट में दस ओवर तक हमारे दो-तीन बल्लेबाज पेवेलियन लौट चुके होते थे। अच्छी शुरुआत न मिल पाने से बाद के बल्लेबाजों पर दबाव आ जाता था और हम स्लाग ओवरों में ज्यादा फायदा नहीं उठा पाते थे। हम 10-15 रन पीछे रह जाते थे। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच में भी ऐसा ही हुआ।’

तेज गेंदबाजों की दरकार
धोनी का मानना है कि टीम को ऐसे तेज गेंदबाजों की जरूरत है जिनकी रफ्तार 140 किमी से ज्यादा की हो। धोनी ने कहा, ‘हमें डेथ ओवरों में गेंदबाजी की समस्या हो रही है। हमें कुछ ऐसे तेज गेंदबाजों की जरूरत है जिनकी रफ्तार 140 किमी से ज्यादा की हो। हालांकि हमारे पास ऐसे कुछ गेंदबाज हैं लेकिन हमें उनका सही तरीके से विकास करने की जरूरत है।’

सपाट पिचों पर गेंदबाजी मुश्किल
धोनी ने सपाट पिचों को दोषी ठहराया। धोनी ने कहा, ‘2007 वर्ल्ड कप में तेज गेंदबाजों को मदद मिली थी। वहां स्कोर चाहे जो भी हो उसका बचाव किया जा सकता था। लेकिन यहां विकेट में कुछ भी नहीं था।
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