बीसीसीआई की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं और उसके लिए नई मुसीबत खड़ी की है एयरटेल ने।
क्रिकेट में बढ़ते भ्रष्टाचार और भारत के दक्षिण अफ्रीका दौरे पर बने संकट के बादलों के बीच बीसीसीआई को अब मुख्य प्रायोजक को ढूंढने के लिए मशक्कत करनी होगी, क्योंकि भारती एयरटेल ने बोर्ड के साथ 31 मार्च को खत्म हो चुके अपने अनुबंध को आगे न बढ़ाने का फैसला किया है।
भविष्य में होने वाली घरेलू सीरीजों के लिए नया प्रायोजक ढूंढने के लिए निविदा दस्तावेज को अंतिम रूप देने के वास्ते बीसीसीआई की मार्केटिंग कमेटी की बृहस्पतिवार को मुंबई में बैठक होनी है।
एयरटेल के पास एक सितंबर 2010 से 31 मार्च 2013 तक भारत में होने वाले टीम इंडिया के घरेलू मैचों के प्रायोजन अधिकार थे। इसके लिए कंपनी हर मैच के लिए 3.33 करोड़ रुपए चुका रही थी।
कंपनी को अपने अनुबंध का नवीकरण करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया था, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं करने का फैसला किया। बीसीसीआई के एक अधिकारी की मानें तो आधार मूल्य को छोड़कर निविदा की सभी शर्तों के समान रहने की संभावना है।
फारुख अब्दुल्ला की अगुवाई वाली 23 सदस्यीय बोर्ड की मार्केटिंग कमेटी निविदा की शर्तों को तय करेंगे।
2010 में निविदा शर्तों में प्रति मैच के लिए दो करोड़ रुपए बेस प्राइज रखा गया था। इसमें एयरटेल ने 10 प्रायोजकों के बीच चली बोली में सबसे ज्यादा बोली लगाई थी।