इकम्सा तकनीक से चीनी का कलर निर्धारित करके उसकी गुणवत्ता और मानक अंतरराष्ट्रीय स्तर की बनाई जाएगी। इस दिशा में नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट (एनएसआई) के विज्ञानियों काम शुरू कर दिया है। निदेशक प्रो. नरेंद्र मोहन ने कहा कि चीनी का 31-30 सिरीज ज्यादा लोक प्रिय है। इसका वैल्यूएशन किया जा रहा है। सकारात्मक रिजल्ट आने की उम्मीद है।
एनएसआई की स्टूडेंट एक्टिविटी काउंसिल की साइंटिफिक काउंसिल की तरफ से गुरुवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका उद्घाटन इंटरनेशनल कमीशन फॉर यूनिफार्म मेथड ऑफ शुगर एनालिसिस की वाइस प्रेसीडेंट डॉ. वसुधा केसकर ने किया। साथ ही चीनी मिलों को गुणवत्ता में सुधार लाने की सलाह दी और कहा कि कलर का संतुलन बनाए रखा जाए। माड्यूलेटेड रिफ्लेक्टेंस वैल्यू तकनीक से भी कलर वैल्यू निर्धारित की जाती है। अब हाइब्रिड तकनीक पर जोर दिया जाना है, जिससे चीनी की गुणवत्ता बेहतर होती है। डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि इकमसा की यूनिट 120-150 के आसपास होती है। इस मानक को कंपनियां पूरी नहीं कर पा रही हैं।