शनिवार 5 अक्टूबर को मशहूर लेखक व पद्मश्री रस्किन बांड देहरादून में थे। रस्किन बांड ने बातचीत में बताया कि जिंदगी के हर पल में एक कहानी मौजूद है।
बस यह मायने रखता है कि घटनाक्रमों को आप अपनी आंखों और दिमाग से किस प्रकार देखते हो। रस्किन ने ‘सुजैंस : सेवन हजबैंड्स’ बुक के बारे में बताया इस बुक को लिखते वक्त कई पात्र उनके दिमाग में तेजी से चलते और गायब होते थे।
किताब की मुख्य पात्र को अंतत: उन्होंने चालाक रूप में पेश किया था। बाद में इस पुस्तक की कहानी पर आधारित फिल्म ‘सात खून माफ’ बनी थी। रस्किन ने बताया कि कोई भी लेखक यूं ही बड़ा नहीं हो जाता। उसका चीजों को देखने को नजरिया और पेश करने का तरीका उसे बड़ा बनाता है।
रस्किन की बेताबी
दून में रस्किन बांड के मुरीदों की खासी तादाद है। बरिस्ता में जैसे ही रस्किन पहुंचे तो भारी भीड़ उनसे मिलने को बेताब नजर आई। न केवल उम्रदराज बल्कि कई स्कूलों के बच्चे भी उनसे मिलने को उत्साहित नजर आए। रस्किन के प्रशंसक 45 वर्षीय मुकेश रावत ने कहा कि उन्होंने रस्किन की सभी बुक पढ़ी हैं। उन्हें सबसे ज्यादा ‘सेक्रेट्स’ पसंद आई थी। एक स्कूल की छात्रा सुनीति ने बताया कि रस्किन बांड उनके फेवरेट राइटर हैं।