राजस्थान हाईकोर्ट की डबल बैंच ने बुधवार को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग को भंग कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से जवाब नहीं देने में टालमटोल करने पर हाईकोर्ट ने दो दिन पहले ही सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अशोक जैन को अवमानना मामले में एक माह के वेतन को दान करने के आदेश दिए थे। यह भी कहा था कि वे जिस संस्था को भी दान दें, उसकी रसीद भी साथ लेकर आएं। जैन ने कोर्ट के समक्ष रसीद भी पेश की।
इस मामले में सरकार द्वारा पेश जवाब में कहा है कि वैधानिक ओबीसी आयोग के गठन के लिए राज्य केबिनेट से मंजूरी हो गई है। शीतकालीन सत्र में इसे विधानसभा से मंजूर करवाकर ओबीसी कमीशन को वैधानिक दर्जा दे दिया जाएगा। इस पर कोर्ट ने ओबीसी कमीशन को भंग कर अध्यक्ष व सदस्यों का वेतन रोकने के आदेश दिए। इस मामले में समता आंदोलन समिति ने यह याचिका लगाई थी।
10 अगस्त 2015 को समता आंदोलन समिति ने यह याचिका लगाई थी। इसमें बताया कि ओबीसी आयोग को कानूनी दर्जा नहीं दे रखा है। इसे वैधानिक रूप से गठित किया जाए। ताकि मूल रूप से आर्थिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग की ईमानदारी से पहचान हो सके और जरूरतमंदों को ही आरक्षण का फायदा मिल सके।