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बोरवेल के भरोसे हैं छोटे शहर

Sat, 06 Dec 2014 03:27 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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सर्वे से पता चलता है कि छोटे शहरों की अधिकांश आबादी पीने के पानी के लिए आज भी सरकारी बोरवेल या सरकारी नल पर निर्भर है। मसलन, झांसी में सर्वे में शामिल 72 फीसदी लोगों ने बताया कि उन्हें सरकारी बोरवेल से पानी लाना पड़ता है।
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वहीं कानपुर जैसे बड़े शहर की आधी आबादी मोहल्ले में लगे सरकारी बोरवेल के भरोसे है। अलबत्ता मेरठ, वाराणसी और बरेली को इस मामले में बेहतर कहा जा सकता है, जहां क्रमशः महज छह, और चार-चार फीसदी लोगों ने माना कि उन्हें पानी के लिए मोहल्ले में लगे बोरवेल तक जाना पड़ता है।

सरकारी बोरवेल के अलावा या नगर निकायों की ओर से लगाए गए नल भी पानी के स्रोत हैं। हालांकि ऐसे नलों पर इन शहरों की सिर्फ दस फीसदी आबादी निर्भर है। जहां गोरखपुर में सर्वाधिक 36 फीसदी लोगों ने माना कि वे पानी के लिए मोहल्ले के सरकारी नल पर निर्भर हैं, वहीं सबसे कम मेरठ में सिर्फ एक फीसदी लोग ही इसके भरोसे हैं।
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राजधानी लखनऊ बेशक पानी की आपूर्ति के मामले में कानपुर और आगरा जैसे शहरों से बेहतर है, लेकिन यहां भी 17 फीसदी आबादी सार्वजनिक नल से पानी लेने को मजबूर है।
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