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'पुलिस को न्यूट्रल गियर से निकालना है'

Tue, 01 Oct 2013 10:25 AM IST
अजित सिंह राठी/अमर उजाला, देहरादून
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प्रदेश के नवनियुक्त पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू विभाग में कुछ नया करना चाहते है। वह साफ कहते है कि मेरे लिए क्या चुनौती होगी, पुलिस विभाग तो बना ही चुनौतियों से निबटने के लिए है।
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नए पुलिस मुखिया साफ कहते है कि कमजोर सुरक्षा एजेंसियों से जनता की हिफाजत नहीं होती, मेरी मंशा इतनी सी है कि न्यूट्रल गियर में चल रही पुलिस की गाड़ी में अब टॉप गियर लगना चाहिए। मित्र पुलिस के फंडे से भी नए डीजीपी बहुत समहत नहीं दिखे। प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख

प्र : नया प्रयोग क्या होगा राज्य पुलिस में ?
उ : मेरे पास पुलिस फोर्स में 34 साल का लंबा तजुर्बा है। उसी के आधार पर प्रयोग करुंगा। मित्र पुलिस का कुछ चेहरा बदलना है, पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ाने के बजाय गुणवत्ता बढ़ाने पर फोकस करना है। अभी पुलिस का पूरा फोकस रेगूलेटरी वर्क पर है, एनफोर्समेंट वाले पक्ष पर काम करने की काफी गुंजाइश है। मसलन, दिन भर में चार सिपाही एक चौराहे पर ट्रैफिक रेगूलेट करते है। यह काफी महंगा सौदा है। यदि लाईटें और स्टॉप साइन की व्यवस्था हो तो हर जगह पुलिस के खड़ा होने की जरूरत नहीं होगी और ये ही पुलिस वाले कानून व्यवस्था में ज्यादा सुधार लाने, लंबित विवेचनाएं पूरी करने, और संगठित अपराध रोकने का काम करेंगे।
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प्र: सबसे पहले क्या करने की जरूरत महसूस करते है ?
उ : मैं देख रहा हूं कि पुलिस न्यूट्रल गियर में चल रही है। मतलब, दो पक्षों का झगड़ा होता है तो भी न्यूट्रल दिखती है। मुझे राज्य की पुलिस को न्यूट्रल गियर से निकालकर टॉप गियर में दौड़ाना है। जो लोग आक्रामक हैं, पुलिस को उनके मुकाबिल खड़ा करना है। आम जनता से निकला एक विशेष वर्ग जो अपने हक के लिए सड़कों पर धरने प्रदर्शन कर जाम लगाता है, दुकाने बाहर निकालकर सड़कों पर अतिक्रमण करता है, उस पर मेरी नजर है। पुलिस को उसी दिशा में डायवर्ट करना है।

प्र :आपके पूर्वाधिकारी भूमाफियाओं पर कार्रवाई नहीं करने का अफसोस लेकर रिटायर हुए है ?
उ : हुंकार भरने से क्या होता है, भूमाफियाओं से पार पाने के लिए चार विभागों के बीच समन्वय होना अनिवार्य है। रजिस्ट्री विभाग, पुलिस, फोरेस्ट और राजस्व। इन विभागों के बीच यदि समन्वय नहीं तो भूमाफियाओं को उखाड़ फेंकने का ख्वाब देखना बेकार है और मीडिया का सपोर्ट चाहिए। जो कि नहीं मिलता। मैं इस कार्य के लिए सार्थक प्रयास करुंगा। क्योंकि मामला केवल पुलिस से जुड़ा नहीं है। क्योंकि पुलिस के पास इस बात के कोई प्रमाण नहीं होते कि कौन भूमाफिया है और कौन नहीं। मुझे पता है कि पुलिस पर भी दबाव होता है, लेकिन मैं यह सुनिश्चित करुंगा कि एक हद के बाद दबाव बेकार हो जाए।

प्र : और क्या रहेगा एजेंडे में ?
उ : कमजोर सुरक्षा एजेंसियों से समाज की हिफाजत नहीं होती, मनोबल बढ़ाने के साथ पुलिसिंग क्वालिटी को सुधारना है। पुलिस को यंत्रों से नहीं व्यवहार से भी आधुनिक बनाने की कोशिश करुंगा और संगठित अपराध को रोकने के लिए रणनीतिक तरीके से काम होगा।

नए डीजीपी का जीवनवृत
: नाम- बीरेंद्र सिंह सिद्धू (निवासी लुधियाना)
: पिता- जगदेव सिंह, (आईएफएस- पंजाब के प्रमुख वन संरक्षक रहे है)
: शिक्षा- पंजाब विवि से बी कॉम व एमबीए गोल्ड मैडलिस्ट, कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से वित्त प्रबंधन में डिप्लोमा।
: बैच- 1979 आईपीएस।
: बैच में सवश्रेष्ठ रहने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री ने बैटन व रिवॉल्वर भेंट किया।
: 1992 व 1993 में राष्ट्रपति ने पुलिस मैडल से नवाजा।
: मुरादाबाद, वाराणसी, आगरा व बरेली में एसपी सिटी रहे।
: सहारनपुर, झांसी, फरुखाबाद, बांदा व मेरठ में एसएसपी तैनात रहे।
: 2004 से 2010 तक सेंट्रल रेलवे आरपीएफ के मुम्बई में मुख्य सुरक्षा आयुक्त के पद पर रहे।
: इसी दौरान वर्ष 2008 में मुम्बई में आतंकी हमलों में टीम के साथ मुकबला किया और रेल मंत्रालय से बीस लाख रुपए का ईनाम मिला। इसी के चलते रेलवे ने सिद्धू को प्रतिनियुक्ति पर एक साल का विस्तार दिया था।
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: ऑल इंडिया पुलिस ड्यूटी मीट में रिवॉल्वर शूटिंग टीम में रहे टॉप थ्री पोजीशन हासिल की।
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