देश के पूर्व सैन्य अफसरों ने शनिवार को काशी में राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंथन किया। बीएचयू के शताब्दी कृषि सभागार में हुए ‘काशी मंथन’ में देश के मौजूदा हालात और वैश्विक परिदृश्य को सामने रखते हुए उन बिंदुओं पर खास तौर से चर्चा हुई, जिन पर देश को सतर्क रहने की जरूरत है।
पूर्व सैन्य अफसरों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आपसी एकजुटता को सबसे अहम तत्व बताया। चीन की महत्वाकांक्षी नीतियां और पाकिस्तान से उसके गहराते रिश्ते को भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता और चुनौती के रूप में पेश किया।
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन ने जम्मू-कश्मीर के परिप्रेक्ष्य में भारत-पाकिस्तान की सैन्य रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि सबसे बड़ा खतरा रडार से नीचे की रणनीति से है। उन्होंने पाकिस्तान और चीन के गहरे होते रिश्ते का जिक्र करते हुए उनके मनोवैज्ञानिक युद्ध की स्ट्रेटजी को भी रेखांकित किया।
अफगानिस्तान और म्यांमार में भारत के राजदूत रह चुके विवेक काटजू ने कहा कि पाकिस्तान एक असंतुष्ट राष्ट्र है। उसकी वास्तविक प्रकृति को समझते हुए भारत को अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रति अपनी नीतियां तय करनी होंगी।