कानपुर रैली में नरेंद्र मोदी के संबोधन के दौरान ली गई तस्वीर
विधानसभा चुनाव की दहलीज पर खड़े उप्र के विपक्षी राजनीतिक दलों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महा परिवर्तन रैली से बड़ा सबक मिला है। रैली में उमड़ी भीड़, युवाओं का उत्साह और मोदी के कहने पर एक साथ उठे लाखों हाथ के सामने नोटबंदी का असर बेअसर रहा। सोमवार को निराला नगर रेलवे मैदान पर कहीं से भी नहीं लग रहा था कि पिछले 41 दिनों से नोटबंदी के लिए कतार में लगे लोगों को केंद्र सरकार के इस फैसले से कोई दिक्कत है।
पिछले कुछ समय से कांग्रेस, सपा और बसपा सहित सभी छोटे बड़े दल भाजपा को नोटबंदी के मसले पर लगातार घेरने में जुटे है। प्रधानमंत्री की इस रैली पर भी इन पार्टियों की निगाह लगी थी। जाहिर है कि यदि यह रैली किसी भी एंगिल से असफल होती तो यह मैसेज बिना कुछ कहे ही आंधी की तरह फैल जाता कि नोटबंदी ने भाजपा का बंटाधार कर दिया। रैली की सफलता ने अब विपक्षियों को कोई और मुद्दा ढूंढने के लिए विवश कर दिया है। इसके बावजूद विपक्षी दल इसे सफल मानने को राजी नहीं हैं। रैली की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें युवाओं की भागेदारी अधिक रही।
सिर्फ युवक नहीं युवतियों ने भी उसी उत्साह के साथ हिस्सेदारी की। इसकी बड़ी वजह यह भी बतायी जा रही है कि प्रधानमंत्री ने युवाओं को कौशलयुक्त रोजगार देने की दिशा में एक नया कदम बढ़ाया है। जिसका शुभारंभ कौशल प्रशिक्षण संस्थान केेंद्र के रूप में किया गया। पता चला है कि प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटी विपक्षी पार्टियां अब इसकी काट के लिए इससे भी बड़ा कार्यक्रम करने की तैयारी में जुट गए हैं। जल्द ही कांग्रेस अपने किसी बड़े नेता की रैली कानपुर में करेगी।