उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए बिजली कटौती एक बड़ी समस्या है। लेकिन सूबे के जिन 11 शहरों में यह सर्वे किया गया वहां के 77 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि वे बिजली के लिए किसी वैकल्पिक स्रोत का इस्तेमाल नहीं करते! यानी इन शहरों के सिर्फ एक चौथाई प्रतिभागियों ने ही माना कि वे बिजली चली जाने पर किसी न किसी वैकल्पिक साधन का इस्तेमाल करते हैं।
वैकल्पिक साधन के रूप में इन्वर्टर लोगों की पहली पसंद है। इस मामले में मेरठ सबसे आगे है, जहां 64 फीसदी लोगों ने माना कि बिजली चली जाने पर वे इन्वर्टर का इस्तेमाल करते हैं।
छोटे शहरों में अलीगढ़ में सर्वाधिक 35 फीसदी लोग इन्वर्टर के भरोसे होते हैं। इन्वर्टर के अलावा सोसाइटी में लगे जनरेटर भी बिजली का स्रोत हैं, हालांकि इसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या काफी कम है। संभवतः इसकी बड़ी वजह यह है कि जनरेटर अमूमन ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों में ही उपल्बध होते हैं।
हैरानी की बात है कि सौर ऊर्जा का वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में काफी प्रचार किया जाता है, लेकिन घरों में इसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या नगण्य है। बिजली की सर्वाधिक मार गरीब तबके को भुगतनी पड़ती है। निम्न आय वर्ग के लोगों ने बिजली की स्थिति पर असंतोष जताया।