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रामवृक्ष पर उठे सवाल ने पहुंचा दिया जेल

Sat, 12 Dec 2015 02:21 AM IST
अमर उजाला
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गोरखपुर। अमर मणि और मधु मणि त्रिपाठी ही नहीं राजनीतिक रसूख वाले कई कैदी जेल की जगह मेडिकल कॉलेज में लंबे समय से पनाह लिए हुए थे। विपक्षियों की शिकायतों के क्रम में मेडिकल कॉलेज और प्राइवेट वार्डों का इस्तेमाल बंदियों की आरामगाह की तरह होने पर कई दफा सवाल उठे लेकिन इस मामले में जेल और जिला प्रशासन से लेकर मेडिकल कॉलेज प्रबंधन तक किसी के हस्तक्षेप न करने से स्थितियां नहीं बदलीं।
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मेडिकल कॉलेज में भर्ती सजायाफ्ता कैदी रामवृक्ष यादव के मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने इस मुद्दे पर सवाल उठाया और शासन को 17 जनवरी तक रिपोर्ट देने की बाध्यता रखी तो एकाएक रामवृक्ष यादव की 25 नवंबर को जेल शिफ्टिंग से शुरू हुआ सिलसिला मेडिकल कॉलेज में मौजूद आठ बंदियों की शिफ्टिंग पूरी होने पर ही थमा।
हाईकोर्ट की सख्ती देख शासन ने न सिर्फ एडीजी जेल डीएस चौहान और डीजी चिकित्सा शिक्षा डॉ. वीएन त्रिपाठी को मेडिकल कॉलेज के दौरे पर भेजा बल्कि इलाज करा रहे कैदियों की स्थिति की रिपोर्ट 14 दिसंबर तक पेश करने की शर्त भी मेडिकल कॉलेज के सामने रखी। इसके बाद आई तेजी में राम मिलन यादव को तीन दिसंबर की आधी रात को ही मेडिकल कॉलेज से जेल की बैरक तक पहुंचा दिया गया।
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अगले दिन सजायाफ्ता कैदी गोपाल यादव की जेल शिफ्टिंग की कवायद को अंजाम तक पहुंचाया गया। इसी तरह रामायण यादव भी जेल शिफ्ट किए गए। इसी क्रम में महराजगंज से पथरी का ऑपरेशन कराने आए सजायाफ्ता कैदी राजेश द्विवेदी को ऑपरेशन के पांच दिन बाद ही जेल की राह दिखा दी गई। शुक्रवार को अमर मणि, मधु मणि त्रिपाठी और मारकंडेय शाही को भी जेल भेज दिया गया।
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