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एनजीटी के आदेश ताक पर, नगर निगम में दौड़ रहे बूढ़े वाहन

Thu, 21 Feb 2019 01:55 AM IST
Gaurav sharma न्यूज ब्यूरो, अमर उजाला

सार

डीजल पीने के साथ ही फैला रहे प्रदूषण
- 30 साल पुरानी गाड़ियों में चल रहे निगम के अफसर
- नगरायुक्त ने भी ऐसे वाहनों के डीजल का भुगतान न करने दिए निर्देश
-  फिर भी हो रहा है ऐसे वाहनों केडीजल का भुगतान
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एनजीटी
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विस्तार
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नगर निगम में बूढ़े वाहन जरूरत से ज्यादा तेल तो पी ही रहे हैं साथ ही शहर में प्रदूषण भी फैला रहे हैं। एनजीटी के आदेश का भी निगम प्रशासन पर कोई असर नहीं है। जबकि इन वाहनों के रखरखाव पर भी सरकारी खजाना खर्च हो रहा है, लेकिन प्रतिबंध के बाद भी निगम के यह वाहन शहर में बेधड़क दौड़ रहे हैं।
  नगर निगम में अधिकतर अधिकारियों के पास 30 साल पुरानी सरकारी गाड़ी हैं। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए एनजीटी ने दस से 15 साल पुरानी गाड़ियों पर प्रतिबंध लगा रखा है। सरकारी मशीनरी प्राइवेट वाहनों पर तो शिकंजा कस रही है, लेकिन सरकारी अधिकारियों की गाड़ी को नहीं रोका जा रहा है। अगर हम बात करें तो चीफ इंजीनियर, अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता, अवर अभियंता, टैक्स विभाग के अधिकारियों के पास पुरानी गाड़ी हैं। जिनके रखरखाव पर भी प्रतिवर्ष लाखों रुपये का बिल पास होता है। ऐसे में सीधे सीधे सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।

नहीं होने देंगे भुगतान

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एनजीटी के आदेश के अनुसार निगम की अधिकतर गाड़ी बंद हैं। कुछ गाड़ियां किराए पर भी लेने की तैयारी है। अगर गलती से बूढ़े वाहनों का डीजल भुगतान हो रहा है तो उसको रोका जाएगा।  - मनोज कुमार चौहान, नगरायुक्त।


 नगरायुक्त ने ऐसे वाहनों को डीजल देने से किया इंकार
- एनजीटी के आदेश के बाद नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने निगम की ऐसी सभी गाड़ियों को खड़ी करने और उनके लिए डीजल न देने के निर्देश दिए हुए हैं। उसके बाद भी ऐसी सभी गाड़ियों के डीजल खर्च की फाइल तैयार हो रही हैं। साथ ही बगैर जानकारी के नगरायुक्त भी इन गाड़ियों के डीजल खर्च को स्वीकृत कर रहे हैं।
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जलकल विभाग की कई गाड़ी पुरानी
- दस से 15 साल पुरानी गाड़ी निगम के अधिकारी ही नहीं चला रहे हैं बल्कि जलकल विभाग की चार सीवर जेटिंग मशीन और अन्य वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। सभी का डीजल भुगतान प्रतिमाह हो रहा है। यह सीधे सीधे एनजीटी के आदेशों का उल्लंघन है।
 
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