पीजीआई की ट्रांसफ्यूजन अधिकारी डा. वी ऊषा राव महिलाओं के लिए एक मिसाल हैं। वे महिला होकर भी 104 बार ब्लड डोनेट कर चुकी हैं। अब तक किसी भी महिला ने इतनी बार ब्लड डोनेट नहीं किया है। यह अपने आप में एक रिकार्ड भी है और उन लोगों के लिए एक संदेश भी हैं, जो रक्तदान देने से कतराते हैं।
उन्होंने बताया जब वे इमरजेंसी में तैनात थी तो उस दौरान जो मरीज आते थे, उन्हें रक्त की बहुत जरूरत पड़ती थी। खून के लिए मरीजों व उनके परिजनों को कई बार तड़पते देखा। एमबीबीएस की पढ़ाई के दौरान ही रक्तदान करना शुरू कर दिया था, लेकिन जब से इस प्रोफेशन में आईं तब से वे रेगुलर दान करने लगी। रक्तदान के प्रति कम जागरुकता पर वे कहती हैं कि जब वे 104 पर ब्लड डोनेट कर सकती हैं तो बाकी लोग क्यों नहीं?
जब उनसे पूछा गया कि आम तौर पर महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी होती है तो वे कैसे रक्तदान करें तो उनका जवाब था कि हरी सब्जियां खाएं, अपने आप ही एचबी की कमी पूरी हो जाएगी। सीजनल फल खाएं। सकारात्मक सोच रखे और सेल्फ मोटीवेट होकर रक्तदान करे।
उन्होंने बताया कि महिलाओं को सिर्फ प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड डोनेट नहीं करना चाहिए। बाकी 18 साल से ऊपर वे कभी भी डोनेट कर सकती हैं। दो महीने पहले ही डा. उषा ने ब्लड डोनेट किया है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपनी मैरिज एनिवर्सरी, अपने बर्थ डे व अपने बेटे व बेटियों के बर्थ डे पर रक्तदान कर एक सामाजिक जिम्मेदारियों को निभा सकते हैं।