दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन में काम किया तब भी मैंने राजनीतिक दबाव को कभी नहीं झेला। तब हम ई. श्रीधरन के साथ काम कर रहे थे।
अभी भी उनकी ही सलाह पर ही काम करना है, इसलिए किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में काम यहां भी नहीं किया जाएगा।
सरकार भी चाहती है कि दिसंबर-2016 तक हर हाल में ये काम पूरा हो जाए और पहले आठ किलोमीटर के रूट पर मेट्रो परिचालन शुरू हो। हर हाल में ऐसा ही होगा।
मेरा जन्म लखनऊ में हुआ है, इसलिए यहां मेट्रो की सौगात देना मेरा सबसे बड़ा लक्ष्य है। मैं टेक्नोक्रेट हूं, इसलिए बातें कम और काम ज्यादा करूंगा।
मंगलवार को पदभार ग्रहण करने के बाद लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (एलएमआरसी) के नवागत प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने ये बातें कहीं।
पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अभी बहुत कुछ जानना और समझना पड़ेगा, मगर कुछ बातें हैं जो बेसिक तौर पर साफ हैं।
उनका सबसे बड़ा लक्ष्य दिसंबर-2016 में प्राइमरी सेक्शन में मेट्रो परिचालन शुरू करना है। यह हर हाल में कर लिया जाएगा। इसी लक्ष्य के आधार तेजी से काम होंगे।
उन्होंने बताया कि 2008 में लखनऊ मेट्रो रेल की डीपीआर और अन्य पहलुओं पर काम शुरू होने के साथ वह परियोजना में जुड़े हुए हैं।
काम में देरी से होगा नुकसानमेट्रो के काम में अगर विलंब होगा तो वास्तविकता में नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसलिए हमारी कोशिश है कि काम में देरी न हो। काम कब से शुरू हो सकेगा इसकी जानकारी अभी वह नहीं दे सकते हैं, मगर ये तय है कि दिसंबर-2016 में ये जरूर पूरा हो जाएगा और राजधानी में मेट्रो दौड़ना शुरू हो जाएगी।
कम स्टाफ से लेंगे बेहतर कामहमारा लक्ष्य है कि निर्माण के दौरान बहुत कम स्टाफ के जरिये ही काम लिया जाए। कुमार केशव ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में करीब 60 हजार करोड़ रुपये के 500 किमी लंबे निजी कंपनी के रेलवे प्रोजेक्ट से वे जुड़े थे। उसमें केवल 45 अधिकारियों और कर्मचारियों का आफिशियल स्टाफ ही था।
ऐसा ही कुछ यहां भी किया जाएगा। जो ठेकेदार काम करेंगे वे अपना स्टाफ अलग रखेंगे। इसके अलावा परिचालन के समय तो स्टाफ की आवश्यकता पड़ेगी ही।