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जाट आंदोलन के साइड इफेक्ट दिखने शुरु, यात्री हो रहे परेशान

Mon, 06 Feb 2017 04:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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धरने पर डटे रहे जाट - फोटो : अमर उजाला
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आरक्षण के मद्देनजर परिवहन विभाग ने सात जिलों से 107 बसें पुलिस व पैरामिलिट्री फोर्स को लाने ले जाने के लिए प्रशासन के हवाले कर रखी हैं। लोकल रूट की इन बसों को प्रशासन के हवाले किए जाने से स्थानीय यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 
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रोहतक जिले में 28 बसें प्रशासन के हवाले हैं। इनमें से करीब 24 बसें तो पुलिस लाइन में हैं और चार बसें राजीव गांधी स्टेडियम में लगाई गई हैं। लोकल रूट से बस हटाने के चलते दैनिक यात्रियों और कर्मचारियों को दिक्कत हो रही है। 

सोनीपत में रोडवेज ने फोर्स को 33 बसें सौंपी हैं। इनमें 23 बसें सोनीपत डिपो व 10 बसें गोहाना बस स्टैंड की शामिल हैं। यह बसें रोजाना 12 रूटों पर चलती थीं, इस समय बसों का आवागमन बंद होने से विभाग को हर दिन चार लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
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अकेले सोनीपत में रोडवेज को करीब 30 लाख के राजस्व का नुकसान

Jat reservation - फोटो : अमर उजाला
हिसार में  रोडवेज ने प्रशासन को 15 बसें मुहैया करवाई थीं। दिल्ली, चंडीगढ़, पानीपत और गुरुग्राम के लंबे रूटों पर बसों की कमी के कारण रोडवेज जीएम ने प्रशासन से बसें वापस भेजने की मांग की थी। उसके बाद 6 बसें रोडवेज को लौटा दी गईं।

झज्जर में जिला प्रशासन को 12 बसें दी गईं थी। इस कारण ग्रामीण रूटों की सेवाएं काफी हद तक कम हो गई हैं। चरखी दादरी में सुरक्षाबलों के लिए रोडवेज ने अपनी 12 बसें मुहैया करवाई हैं। जींद में 12 बसें प्रशासन को दी गई हैं। भिवानी में प्रशासन ने 29 जनवरी को 15 बसें ली थीं लेकिन अब प्रशासन के पास सिर्फ सात बसें हैं।
 
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