चारु नाम से मशहूर उत्तराखंड की स्नेह राणा की उड़ान का सफर आसान नहीं रहा। कभी समाज का बंधन तो कभी राज्य में क्रिकेट के पुरोधाओं की लड़ाई रास्ता रोकने को तैयार थी।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम से जुड़ने के लिए दिल्ली जाने से पहले स्नेह ने अमर उजाला से बातचीत में कई पहलुओं पर चर्चा की। पेश हैं प्रमुख अंश।
सवाल- क्रिकेट की शुरुआत कैसे हुई, यहां तक के सफर में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा?
जवाब- बचपन में गांव में लड़कों को खेलते देख मुझमें भी क्रिकेट का शौक जगा और मैंने उन्हीं के साथ खेलना शुरू किया। दो-तीन साल तक लड़कों के साथ ही खेलती रही। खेल की बारीकियां सीखने के लिए 2002-03 में लिटिल मास्टर क्रिकेट क्लब ज्वाइन किया।
शुरू में परिवार से सपोर्ट नहीं मिला, बाद में सभी ने खेलने की अनुमति दे दी। रोज करीब 15-16 किमी दूर परेड ग्राउंड आना पड़ता था। कई बार घर पहुंचने में देरी हो जाती थी। 2010-11 में पंजाब के लिए ट्रायल दिया तो चयन हो गया। इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सवाल- क्या खेल विभाग और सरकार से सहयोग मिला। पंजाब में महिला क्रिकेट टीम की स्थिति कैसी है?
जवाब-पंजाब में शुरुआत में एडजेस्ट करने में दिक्कत हुई। वहां लड़कियां खेल के प्रति अधिक सीरियस नहीं हैं। आगे बढ़ने पर बेसिक चीजें नहीं सिखाई जातीं। मगर कोच नरेंद्र शाह और किरन शाह ने जो शुरुआत कराई वही मेरे काम आ रही है। राज्य सरकार से एक बार 20 हजार रुपये का सहयोग बांग्लादेश टूर के लिए मिला था।
सवाल- क्या भविष्य में उत्तराखंड वापसी का विचार है। क्या अन्य राज्यों से भी बुलावा आया?
जवाब- यह मेरी मातृभूमि है। यहीं से मैंने खेल की बारीकियां सीखी हैं, लेकिन उत्तराखंड से नहीं खेल पाने का मलाल है। जब तक उत्तराखंड को मान्यता नहीं मिल जाती, तब तक पंजाब के लिए खेलती रहूंगी। पंजाब टीम के जरिये ही मेरा सपना पूरा हुआ है।
सवाल- अब तक घरेलू क्रिकेट में आपका प्रदर्शन कैसा रहा। आइडियल खिलाड़ी किसे मानती हैं?
जवाब- सचिन तेंदुलकर मेरे आइडियल खिलाड़ी हैं। महिला टीम में हरमनप्रीत कौर पसंदीदा खिलाड़ी हैं। घरेलू क्रिकेट में मुझे तीन साल इंटर जोनल, दो चैलेंजर ट्रॉफी और बोर्ड प्रेसीडेंट की टीम से खेलने का मौका मिला। चैलेंजर ट्रॉफी में एक साल इंडिया ग्रीन और एक साल इंडिया रेड का हिस्सा रही। वहीं 2013 में चैलेंजर ट्रॉफी में ग्रीन के खिलाफ 6 विकेट सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।
सवाल- श्रीलंका के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए कोई खास तैयारी, क्या होगा नया गेंदबाजी अस्त्र?
जवाब- मैं ऑफ स्पिन गेंदबाजी करती हूं। साथ ही बीच-बीच में गुगली और लेग स्पिन भी। श्रीलंका के खिलाफ मैच में पूरा फोकस बल्लेबाजों को रन बनाने से रोकने पर होगा। इस टूर्नामेंट में लेग कटर मेरी खास गेंद होगी, जिस पर लंबे समय से मेहनत कर रही हूं। बतौर बल्लेबाज टीम के जरूरत के अनुरूप खेलने पर फोकस रहेगा।
स्नेह की सफलता से सिर हुआ ऊंचा
भारतीय महिला क्रिकेट टीम में स्नेह के चयन पर लिटिल मास्टर क्रिकेट एकेडमी में जश्न का माहौल है। एकेडमी के कोच नरेंद्र शाह ने कहा कि स्नेह की सफलता से आज उनकी कोचिंग सफल हो गई। स्नेह पर उनको शुरू से ही विश्वास था।
बुधवार को हिंदी भवन में एकेडमी के कोच नरेंद्र शाह ने बताया कि स्नेह ने 8 साल तक एकेडमी के लिए खेला। पहला मैच रोबटर्सगंज में 10 साल की उम्र में खेला था, जिसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, ढाका, नेपाल, भूटान समेत कई जगह स्नेह ने अपने खेल का जलवा दिखाया।
हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़ने के एक साल बाद ही स्नेह ने अमृतसर के डीबीके कालेज में दाखिला लिया। यहीं से अंडर-19 और सीनियर टीम की शुरुआत हुई। वहीं कोच किरन शाह बताती हैं कि स्नेह बचपन में बहुत शर्मीली थी।
2002-03 में सिनोला गांव में एकेडमी ने एक टूर्नामेंट कराया था, तब एक लड़की आम के पेड़ के पीछे छिपकर मैच देख रही थी। उसे जबरदस्ती सामने बुलाकर पूछा तो पता चला कि वह स्नेह राणा है।
उसके बारे में गांव के लोग बताया करते थे कि बहुत अच्छा खेलती है। इसके बाद उसे एकेडमी में ज्वाइन कराया। उन्होंने कहा कि स्नेह बचपन से ही मेहनती थी और शांत रहना पसंद करती है।
नाम - स्नेह राणा
निकनेम - चारु
गांव - सिनौला, देहरादून
जन्म तिथि - 18 फरवरी 1994
टीम - भारतीय महिला क्रिकेट टीम, इंडिया रेड, पंजाब सीनियर महिला क्रिकेट टीम