ब्लड ग्रुप का मिलान किए बिना सफदरजंग अस्पताल में पहली बार 43 वर्षीय पुरुष में किडनी का सफल प्रत्यारोपण हुआ। एबीओ तकनीक से प्लाज्मा एक्सचेंज से ब्लड ग्रुप की एंटीबॉडी दबा दी जाती है, जिससे दूसरे ग्रुप की किडनी भी सफलता से काम करने लगती है। अभी तक यह सुविधा एम्स और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में उपलब्ध थी। अब सफदरजंग अस्पताल में भी यह सुविधा मुफ्त उपलब्ध है। निजी अस्पतालों में यह सुविधा 10 से 15 लाख रुपये में उपलब्ध होती है।
इस बारे में अस्पताल में नेफ्रोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. हिंमाशु वर्मा ने बताया कि छह फरवरी को यह सफल प्रत्यारोपण हुआ। सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह से ठीक है। मरीज को उसकी 28 साल की पत्नी ने किडनी दान की है। मरीज की डायलिसिस चल रही थी। उसकी जान बचाने के लिए किडनी प्रत्यारोपण की जरूरत थी, लेकिन उसका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था और पत्नी का ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव था। ऐसे में डॉक्टरों ने एबीओ तकनीक के जरिये सफल प्रत्यारोपण किया। एबीओ प्रत्यारोपण में अंगदान करने वाले और अंग प्राप्त करने वाले का ब्लड ग्रुप एक नहीं होता है।
यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. पवन वासुदेवा का कहना है कि यह सर्जरी करीब चार घंटे चली। इसमें सर्जरी के दौरान प्लाज्मा एक्सचेंज कर ब्लड ग्रुप की एंटीबॉडी को दबा दिया जाता है जिससे किडनी आसानी से दूसरे में काम करने लगती है। यह सर्जरी ऐसे मरीजों के लिए काफी मददगार साबित होगी जिनमें किडनी दान करने वालों का ब्लड ग्रुप मैच नहीं करता। इस सर्जरी को सफदरजंग अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वंदना तलवार ने मील का पत्थर बताया। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद लोगों को यह सुविधा मुफ्त में उपलब्ध हो पाएगी।
2013 में शुरू हुआ था किडनी प्रत्यारोपण
सफदरजंग में सामान्य किडनी प्रत्यारोपण की सुविधा साल 2013 में शुरू हुई थी। अब एबीओ प्रत्यारोपण की शुरुआत हुई है। यह विशेष तकनीक है। इसमें अंगदान करने वाले और अंग प्राप्त करने वाले का ब्लड ग्रुप एक नहीं होता है। ऐसा होने पर मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए इंतजार नहीं करना होगा। परिवार या अन्य कोई भी किडनी दान कर सकेंगा।