एएमयू छात्र आलमगीर के हत्यारे पुलिस की गिरफ्त से ज्यादा दूर नहीं। चुंगी गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे में घटनाक्रम कैद हो गया है। फुटेज की सीडी पुलिस प्रॉक्टर ऑफिस से लेकर उसे खंगालने में लगी है। इसके आधार पर कई जगह छापेमारी भी की गई। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही हत्याकांड में लिप्त लोग धरे जाएंगे।
एएमयू के चुंगी वाले गेट पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इसका संचालन प्रॉक्टर ऑफिस से होता है। जिस वक्त छात्र आलमगीर को गोली मारी गई थी, कैमरे चालू थे। कैमरे घटनास्थल से मात्र 25 से 30 मीटर की दूरी पर लगे हुए हैं। जिसके चलते आलमगीर के साथ हुआ घटनाक्रम इसमें कैद हो गया है। पुलिस और एएमयू इंतजामिया ने पहले ही दिन फुटेज की सीडी बनाकर अपने पास सुरक्षित रख ली थी। इसे आधार मानकर पुलिस तफ्तीश में जुटी है। इस दौरान पुलिस ने कई जगह छापेमारी की। उम्मीद जताई जा रही है कि पुलिस जल्द ही हत्याकांड का खुलासा कर देगी।
अब खंगाली जा रही मददगारों की कुंडली
आलमगीर हत्याकांड में नामजद टीम आशुतोष मिश्रा और उनके खास सदस्य मुनीर, रेहान, शादाब के मददगार भी पुलिस के निशाने पर हैं। पुलिस ने कैंपस, शहर और शहर से बाहर रहने वाले सभी मददगारों की सूची बनाना शुरू कर दिया है। अब तक आधा दर्जन से अधिक को चिह्नित कर लिया गया है और कुछ को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है। इन सभी पर कार्रवाई होना तय माना जा रहा है। सभी आरोपियों के परिवारों को भी रडार पर लिया गया है। एसपी सिटी से लेकर एसएसपी तक इस पूरे घटनाक्रम पर बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।
आशुतोष की पिटाई ने रखी हत्या की नींव?
पुलिस की अब तक की जांच का इनपुट है कि करीब दो साल पहले एएमयू के एक छात्र की डेंगू से मौत हो गई थी। उसकी मौत के बाद शव के साथ एक बस भरकर काफी संख्या में छात्र गए थे। जहां रास्ते में कहीं आलमगीर व आशुतोष में झगड़ा हुआ था। उस समय आलमगीर ने आशुतोष की पिटाई कर दी थी। माना जा रहा है कि वहीं से इस हत्या की नींव रखी गई है। मगर यह सवाल भी है कि इतने दिन बाद इस पिटाई का बदला हत्या की वजह नहीं हो सकती। कहीं इस गैंग ने किसी इशारे पर तो यह काम नहीं किया। यही वजह है कि आशुतोष के मददगारों से लेकर पिछले दो माह में उससे मुलाकात करने वालों की सूची भी बनना शुरू हो गई है और सभी पर कार्रवाई तय है।
एएमयू के प्रवेश-निकास के सीसीटीवी पर अध्ययन
पुलिस की टीम एएमयू इंतजामिया द्वारा दिए गए एएमयू के बाब-ए-सैयद से लेकर पुरानी चुंगी के गेट तक आने व जाने वाले हर व्यक्ति को घटना से एक घंटे पहले लेकर एक घंटे बाद तक बारीकी से देख रही है। उन्हीं में हत्यारों को पकड़ा जा सकेगा। यह भी एक तथ्य है कि हत्यारोपियों में इन आरोपियों के साथ कुछ अन्य शूटर भी हो सकते हैं। क्योंकि जिस अंदाज में .32 बोर के हथियार से गोलियां बरसाई गई हैं, वह किसी पेशेवर शूटर का ही काम है। हालांकि मुनीर गैंग इस काम में काफी तेज है। फिर भी पुलिस सभी पहलुओं पर ध्यान देकर काम कर रही है।