उसने पति को पुलिस से छुड़ाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने कहा कि पूछताछ के लिए ले जा रहे हैं, अगले दिन छोड़ देगें। 28 अगस्त 2006 को थाना सिढ़पुरा की पुलिस ने एक लुटेरे की मुठभेड़ में मौत बताई। उसके शव को अज्ञात में जला देने के बाद बताया कि वह राजाराम था। संतोष ने बताया कि वे पहले केस दर्ज कराने के लिए थाने गए तो पुलिस ने भगा दिया।
2007 में सीबीआई ने शुरू की थी जांच
जिला अदालत में प्रार्थना पत्र दिया तो अर्जी खारिज हो गई। इसके बाद वे लोग हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सीबीआई जांच के आदेश दिए। 2007 में जांच शुरू कर सीबीआई ने 2009 में सिढ़पुरा के तत्कालीन थाना प्रभारी पवन कुमार सिंह सहित दस पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान आरोपी दरोगा अजंट सिंह की मौत हो गई। नौ पुलिसकर्मी हत्या और साक्ष्य मिटाने के दोषी सिद्ध हुए।
ये पाए गए दोषी
1 पवन सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष, थाना सिढ़पुरा, जनपद एटा
स्थाई पता : ग्राम बदेहरी थाना छपार, जनपद मुजफ्फरनगर
2. श्रीपाल ठेनुआ, तत्कालीन उपनिरीक्षक, थाना सिढ़पुरा जनपद एटा
स्थाई निवासी : ग्राम बदेहरी थाना छपार, जनपद मुजफ्फरनगर
3. सरनाम सिंह, तत्कालीन आरक्षी, थाना सिढ़पुरा, एटा
स्थाई निवासी करूणामयी नगरिया, थाना बेवर, मैनपुरी
4. राजेन्द्र प्रसाद तत्कालीन आरक्षी थाना सिढ़पुरा एटा
स्थाई निवासी: डिनौली, थाना टूंडला फिरोजाबाद
5. मोहकम सिंह तत्कालीन सरकारी वाहन चालक थाना सिढ़पुरा
निवासी नंगला डला तहसील करहल, मैनपुरी
6.बलदेव प्रसाद, आरक्षी सिढ़पुरा थाना
निवासी कस्बा व थाना हरपालपुर, हरदोई
7.अवधेश रावत तत्कालीन आरक्षी सिढ़पुरा
निवासी ग्राम नंगला तेजा पोस्ट रिधौरी कटरा, थाना रूवेन, आगरा
8. अजय कुमार तत्कालीन आरक्षी सिढ़पुरा थाना
निवासी ग्राम धीप, थाना घिरौर मैनपुरी
9. सुमेर सिंह आरक्षी, सिढ़पुरा
निवासी नंगला तेजा पोस्ट रिधौरी कटरा थाना रूवेन, आगरा
एक भी केस दर्ज नहीं फिर भी बताया लुटेरा
राजाराम के खिलाफ किसी भी थाने में कोई केस दर्ज नहीं था। वह पुलिसवालों के घर भी फर्नीचर की मरम्मत का काम करता था। इसके बावजूद उसे लुटेरा बताकर मुठभेड़ में उसकी हत्या की। पुलिसवाले उसे पहचानते थे, फिर भी शव की शिनाख्त नहीं की और अज्ञात में दाह संस्कार किया। उसके परिजनों को उसके मर जाने की सूचना भी नहीं दी। कोर्ट में पुलिस न तो उसे लुटेरा साबित कर सकी और न ही मुठभेड़ को असली।
बेगुनाह के खून से सनी खाकी
1. 18 अगस्त 2006 : दोपहर तीन बजे रिश्तेदारी में जाते समय उठाया गया था राजाराम को।
2. 18 अगस्त 2006 : रात पौने आठ बजे सुनहरा गांव के जंगल में गोली मारकर कर दी थी हत्या।
3. एक जून 2007 : हाईकोर्ट ने केस दर्ज कर सीबीआई जांच का आदेश दिया।
4. 22 जून 2009 : सीबीआई कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
5. चार दिसंबर 2015 : गवाही शुरु हुई, कुल 202 गवाह पेश किए सीबीआई ने।