जिला कांगड़ा की 13 ब्लाक समितियों में जीते प्रत्याशी जीत के बाद राजनीतिक विचारधारा को लेकर मौन हो गए हैं। जीते हुए प्रत्याशी अब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद की लाबिंग के लिए सियासी गोटियां फिट करने में लग गए हैं। इसलिए, खुले तौर पर अधिकतर विजयी प्रत्याशी खुलकर अपने सियासी पत्ते नहीं खोल रहे हैं। अधिकतर प्रत्याशी खुद को खुले रूप से किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हुआ बताने से परहेज करते रहे।
वहीं, कांग्रेस और भाजपा शुक्रवार को आए बीडीसी के चुनाव परिणाम में अपना अपना बहुमत आने का दावा कर रहे हैं। कांग्रेस के संगठनातमक जिला देहरा के अध्यक्ष नरदेव कंवर और भाजपा के संगठनात्मक जिला देहरा के अध्यक्ष नरेश चौहान ने जिला अपने अपने बहुमत आने का दावा किया। वहीं, पालमपुर, नूरपुर और कांगड़ा संगठनात्मक जिलों के कांग्रेस और भाजपा अध्यक्ष भी अपना अपना बहुमत आने का दावा कर रहे हैं।
उधर, जिला कांगड़ा की 13 ब्लॉक समितियों की 363 सीटों में से करीब 176 सीटों पर महिलाओं ने कब्जा किया है। खबर लिखे जाने तक 27 सीटों पर चुनाव परिणाम नहीं निकले थे। यानी, 363 में से महिलाओं ने 176 सीटों से ज्यादा सीटों पर कब्जा किया है। वहीं, खबर लिखे जाने तक पुरुषों 187 सीटों पर ही जीत पाए थे।
वहीं, बीडीसी के चुनाव परिणाम में कई निवर्तमान अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी चुनाव हार गए हैं। प्रागपुर से निवर्तमान उपाध्यक्ष कमलेश शर्मा चुनाव हार गए। वहीं, नगरोटा बगवां के निवर्तमान उपाध्यक्ष कुलदीप नारायण भी चुनाव हार गए। कुलदीप कांग्रेस समर्थित थे। नगरोटा सूरियां से निवर्तमान अध्यक्ष वीना देवी चुनाव हार गईं। लंबागांव से निवर्तमान अध्यक्ष पवना देवी चुनाव हार गईं।