बनबसा से लेकर बंगाल की खाड़ी तक 2000 किलोमीटर की यात्रा कयाकिंग के जरिए पूरी कर माटी संगठन की संचालिका मल्लिका विर्दी और उनके पति थियो फिलप बृहस्पतिवार को यहां पहुंच गए हैं। इस यात्रा को उन्होंने 80 दिन में पूरा किया। उन्होंने इस दौरान नदियों में प्रदूषण की स्थिति, नदी में पाए जाने वाले जल जंतुओं का अध्ययन किया। आज शाम जैसे ही मल्लिका और उनके पति यहां कालामुनि मंदिर के पास पहुंचे तो तमाम लोग उनके स्वागत के लिए उमड़ गए।
मल्लिका विर्दी यहां सरमोली गांव में रहकर महिलाओं को जागरूक करने का काम करती हैं। उनका परिवार पिछले 15 वर्ष से सरमोली गांव में रहता है। छह दिसंबर को इन लोगों ने बनबसा में शारदा से कयाकिंग के जरिए यह सफर शुरू किया। बाद में वह घाघरा, गंगा में कयाकिंग करते हुए बंगाल की खाड़ी पहुंचे। थियो फिलिप ने बताया कि अभी भी गंगा में कई विशालकाय मगरमच्छ हैं।
उन्होंने कहा कि नदी लगातार प्रदूषण का शिकार हो रही है। गंगा को प्रदूषणमुक्त करने की योजनाएं तो बनती हैं, लेकिन उनका असर सामने नहीं आता। वह इस साहसिक यात्रा पर किताब भी लिखेंगे। स्वागत के समय राजेंद्र रावत, बसंती देवी, रामनारायण, प्रधान इंद्र सिंह, कैलाश सुमत्याल, रेखा देवी आदि मौजूद थे।